उदयपुर। फ्रांस के नफीस शहर में जहां सैलानियों का प्यार वहां के ऐतिहासिक पुलों पर भारी पड़ने लगा है, वहीं उदयपुर में वेलेंटाइन डे पर प्रेमी युवाओं ने शहर की विश्वविख्यात पीछोला झील पर बने न्यू पुल को नया

डेस्टिनेशन बना दिया है और इसकी पहचान लव लॉक ब्रिज के रूप में होने लगी है। स्थानीय युवा ही नहीं बल्कि युगल सैलानी भी अपने प्यार के प्रतीक के रूप में नाम लिखे ताले यहां टांगकर उसकी चाबी झील में डालने लगे हैं।

पांच साल पहले इस पुल की कल्पना पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए नगर निगम ने रखी थी। पीछोला के सिटी पैलेस के छोर को चांदपोल देवस्थान के मंदिर को जोड़ने के लिए यह पैदल पुल बनाया गया, ताकि पर्यटक दोनों क्षोर के साथ पुल के बीच से ही झील के सौंदर्य के साथ अपनी यादगार फोटो यहां से ले पाएं।

साथ ही, इस पुल की डिजाइन भी इस तरह रखी गई ताकि लोगों को यह खूबसूरत लगे। इस पुल के अनोखेपन को नया रूप देने के लिए कुछ स्थानीय युवाओं ने यहां अपने नाम के ताले लगाए और चाबी झील में फेंक दी।

इसके बाद तो स्थानीय युवा और सैलानी भी यहां अपने-अपने नाम के ताले लगाकर चाबी झील में फेंकने लगे। एक ही महीने में यह पुल उदयपुर के युवाओं के बीच लव लॉक ब्रिज के रूप में मशहूर हो गया।

इस संबंध में कुछ युवाओं और सैलानियों से बात की तो उन्होंने कहा कि उन्होंने ऐसी कहानी पढ़ और सुन रखी है कि फ्रांस में सैलानी अपने प्यार के नाम पर पुलों पर ताले लगाते हैं।

बस उसी राह को उन्होंने यहां उदयपुर में अपनाया है। वह मानते हैं कि जब क्रिकेटर और नायिका तक अपने प्यार के लिए पुलों पर ताले टांगते हैं तो हम क्यों पीछे रहें।

उदयपुर में यह पुल उन्हें खूबसूरत लगा और यहां ताले लगाकर चाबी झील में डालने का आनंदायक लगा। युवती मारिया का कहना है कि वह उदयपुर आकर हर बार अपने लगाए ताले को ब्रिज पर लगा देखना पसंद करेगी।

इसी तरह की ख्वाहिश दूसरों युवाओं ने जताई, जिन्होंने पुल पर ताले टांगे हैं। युवा हैं, फ्रांस जैसे हालात नहीं होंगे ब्रिज पर युवाओं के ताले लगाने का ट्रेंड शुरू होने पर नगर निगम के मेयर चंद्रसिंह कोठारी का कहना है कि युवा हैं, उन्हें रोक पाना मुश्किल है

ब्रिज नया बना है और अगले चालीस साल तक इसे कोई खतरा नहीं है। युवाओं के ताले टांगने के बावजूद इसकी मजबूती पर कोई विशेष फर्क नहीं पड़ेगा।

किन्तु यहां फ्रांस जैसे हालात नहीं होंगे कि ब्रिज पर तालाबंदी रोकने के लिए कहा जाए। झीलों के लिए ठीक नहीं पर्यावरणविद् और झील संरक्षण समिति के सदस्य अनिल मेहता का कहना है कि यह परम्परा झीलों के लिए ठीक नहीं है। झील में चाबियां डालने से गंदगी बढ़ेगी।

साथ ही, जलचरों के लिए भी यह खतरनाक साबित हो सकता है। जिस समस्या को लेकर यूरोप में पाबंदी लगाई जा रही है, उसकी शुरूआत उदयपुर में की जा रही है, जो गलत है।

पेरिस में ताले बने समस्या

 

पेरिस में ब्रिज पर ताले वहां के स्थानीय लोगों और पर्यावरण के लिए समस्या बन गए थे। यहां तक पर्यावरणविदें का कहना था कि यह परंपरा ऐतिहासिक इमारतों को नुकसान पहुंचाने वाली है।

वहां प्रशासन ने पुलों पर आग्रह पत्र लगवाए, जिनमें लिखा था कि प्रिस सैलानियों कृपया अपने प्यार को अनलॉक कर दें। वहां अभियान के रूप में तालों को हटाने के काम शुरू हुआ था।