नई दिल्ली । राजधानी की जेलों में अब परिंदा भी पर नहीं मार सकेगा की तर्ज पर निगरानी की व्यवस्था की जा रही है। पब्लिक वकर्स विभाग (पीडब्ल्यूडी)  ने एक बड़ी योजना लागू करने की तैयारी की है। तिहाड़, मंडोली और रोहिणी की जेलों पर नजर रखने के लिए पीडब्ल्यूडी 6 हजार से ज्यादा नाइट विज़न सीसीटीवी कैमरे लगाएंगा। ऐसा पहली बार है जबकि दिल्ली की जेलों में नाइट विज़न कैमरे लगाए जा रहे हैं। इस साल के आखिर तक सबसे बड़े कॉम्पलेक्स तिहाड़ में करीब 5 हजार सीसीटीवी कैमरे लगाएं जाएंगे। तिहाड़ देश की सबसे ज्यादा भीड़भाड़ वाली जेल है। इससे पहले 2004 में यहां सीसीटीवी कैमरे लगाए गए थे। अभी यहां 942 कैमरे लगे हैं और नए कैमरे लगने के बाद यह संख्या करीब 6 गुना हो जाएगी। जेल से जुड़े सूत्रों ने बताया कि अभी जेल में लगे अधिकतर सीसीटीवी कैमरे ठीक तरह काम नहीं करते हैं। पीडब्ल्यूडी अधिकारियों के मुताबिक, कैमरों के लिए करीब 120 करोड़ रुपये के बजट की अनुमति प्रशासन से मिली है और अभी 25 करोड़ रुपये की पहली किस्त मंजूर कर दी गई है। नए कैमरे लगने के साथ ही 400 एकड़ में फैले इस कॉम्पलेक्स में कोई भी ऐसी जगह नहीं बचेगी जहां कैमरे की नजर न हो। तिहाड़ में कई हाई-प्रोफाइल कैदी बंद हैं, इनमें आतंकवादी और गैंगस्टर भी शामिल हैं। 
तिहाड़ कॉम्पलेक्स में पिछले कुछ सालों में कई गैरकानूनी गतिविधियां देखने को मिली हैं। जेल अथॉरिटी के लिए इन गतिविधियों को रोकने के लिए कोई योजना बनानी अनिवार्य हो गई थी। जेल अधिकारियों ने पीडब्ल्यूडी के वरिष्ठ अधिकारियों से इस बारे में संपर्क किया और एक योजना बनाई। इस योजना का मकसद जेल से मिल रहीं आपराधिक घटनाओं और शिकायतों की संख्या में कमी लाना है। एक वरिष्ठ पीडब्ल्यूडी अधिकारी ने बताया कि इस योजना को 2018 के मध्य में बनाया गया और दिल्ली सरकार ने इसके लिए दिसंबर में 119 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत किया। फरवरी की शुरुआत में पहली किस्त के तौर पर 25 करोड़ रुपये मिल गए हैं। अधिकारियों ने कहा कि इस योजना के तहत पैन-टिल्ट-ज़ूम, डोम और बुलेट फीचर्स वाले कैमरे लगाए जाएंगे। इससे सुनिश्चित होगा कि जेल के अंदर कोई गैरकानूनी गतिविधि न हो और इससे जेल के अंदर होने वाली हर गतिविधि पर नजर रखने में भी मदद मिलेगी।