पाकिस्तान ने अपनी धरती पर फल-फूल रहे आतंकी संगठनों के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी है. मिली जानकारी के अनुसार पाकिस्तान सरकार ने आतंकवाद विरोधी कानून 1997 के आधार पर आतंकी हाफिज सईद के जमात-उद-दावा और उसके सहयोगी सहयोगी संगठन फलह-ए-इंसानियत फाउंडेशन को बैन कर दिया है.
जमात-उद-दावा प्रमुख हाफिज सईद दुनिया के खूंखार आतंकियों में से एक है. वह भारत और अमेरिका सहित कई देशों में मोस्ट वांटेड है. पाकिस्तान में पंजाब के सरगोधा में पैदा हुआ हाफिज लश्कर-ए-तैयबा का भी चीफ है. जमात-उद-दावा कुछ और नहीं बल्कि लश्कर-ए-तैयबा का ही मुखौटा संगठन है.
हाफिज सईद पाकिस्तान में खुला इसलिए घूम लेता है क्योंकि उसे राजनीतिक संरक्षण मिला हुआ है. वहीं वह दावा करता है कि वह और उसका संगठन सामाजिक सेवा करता है. हाफिज सईद का यह संगठन 300 से भी ज्यादा मदरसे और स्कूल पाकिस्तान में चलाता है.
जमात-उद-दावा का अपना प्रकाशन है, जिसके जरिए वह प्रोपागैंडा पत्र-पत्रिकाएं निकालता है. इसके अलावा जमात के अपने अस्पताल हैं और वह एम्बुलेंस सेवाएं भी देता है. जमात-उद-दावा के पास कम से कम 50,000 वालंटियर आतंकी और बाकायदा सैलरी पाने वाले सैकड़ों आतंकी हैं.
जमात-उद-दावा की आर्थिक गतिविधियों का संचालन फलाह-ए-इंसानियत नाम का संगठन करता है. इसी संगठन के जरिए जमात-उद-दावा अपने लिए फंड इकट्ठा करता है. पूरे पाकिस्तान में इस संगठन और इसके सहयोगियों का तगड़ा नेटवर्क है.
जमात-उद-दावा को संयुक्त राष्ट्र ने लश्कर-ए-तैयबा के साथ ही 2008 में बैन कर दिया था. अमेरिका ने जून 2014 को जमात-उद-दावा को आतंकी संगठन भी घोषित किया था. हाफिज सईद को भी अमेरिका ने वैश्विक आतंकी घोषित कर रखा है और उसका नाम भारत के मोस्ट वांटेड आतंकियों की सूची में भी है.
हाफिज सईद ने साल 2008 में मुंबई पर आतंकी हमला करवाया था. जिसमें 166 लोगों की जान चली गई थी. उसे 2001 में भारतीय संसद पर हुए हमलों का भी मास्टरमाइंड माना जाता है. 2006 में मुंबई लोकल में हुए सिलसिलेवार विस्फोटों के पीछे भी उसी का हाथ था.