जम्मू/कठुआ। सरकार सीमांत क्षेत्रों में आधारभूत ढांचा मजबूत करने के लिए तेज गति से काम कर रही है। अब कठुआ व सांबा क्षेत्र के सीमांत क्षेत्रों के लोग पहली बार सीधे एक-दूसरे से जुड़ पाएंगे। साथ ही किसी प्रकार की चुनौती के समय सेना और सुरक्षा बलों की भी मूवमेंट आसान होगी।

जम्मू और कठुआ के सीमावर्ती क्षेत्रों में सामरिक व क्षेत्रीय दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण दो पुलों का लोकार्पण शुक्रवार को केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह व जम्मू पुंछ के सांसद जुगल किशोर शर्मा ने किया। रक्षामंत्री निर्मला सीतारमण को इनका लोकार्पण करना था और सीमांत क्षेत्रों में सुरक्षा प्रबंधों का जायजा भी लेना था, लेकिन दिल्ली में व्यस्तता और सीमाओं पर तनाव के मद्देनजर उनका दो बार जम्मू आने का कार्यक्रम और दो बार ई-लोकार्पण रदद करना पड़ा। ऐसे में पार्टी हाईकमान ने आचार संहिता लागू होने से पूर्व शुक्रवार को ही दोनों सांसदों को पुलों का उद्घाटन करने के निर्देश दिए।

इन पुलों के लोकार्पण से कठुआ, सांबा और जम्मू जिलों के सीमावर्ती क्षेत्रों के लोगों की राह आसान होगी, सुरक्षा बलों को सीमा पर तेजी से आवागमन के लिए वैकल्पिक मार्ग भी मिल जाएगा। इसमें हीरानगर में 21 करोड़ की लागत से बेई नाले पर एक पुल बनाया गया है। इसके अलावा ओल्ड कठुआ-सांबा मार्ग पर दो पुल और बन रहे हैं। उनका भी जल्द निर्माण पूरा कर लिए जाने की उम्मीद है। वहीं जम्मू का पुल अखनूर में ढोक नाले पर 7.8 करोड़ से बनाया गया है। पुल न होने से लोगों को खड्ड के बीच से जाना पड़ता था।
बेई पर बना सात पिलर का 321 मीटर लंबा पुल

बेई नाले पर सात पिलरों पर बने 321 मीटर लंबे आधुनिक तकनीक के पुल के निर्माण पर करीब 21 करोड़ खर्च हुए हैं। आजादी के बाद सीमांत क्षेत्र के लोगों को बेहतर सड़क मिल पाएगी। सुरक्षा तैयारियों की दृष्टि से भी यह पुल काफी अहम है।

राजा के जमाने में यही था मुख्य मार्ग राजा हरिसिंह के शासन में यही मुख्य मार्ग था। आजादी के बाद कठुआ-सांबा राजमार्ग के निर्माण से पूर्व लखनपुर से सांबा तक इसी मार्ग का इस्तेमाल होता था। बारिश के दिनों में उज्ज, तरनाह और बेई नाले में बाढ़ आ जाने से लोगों का संपर्क परिहवन सुविधा के लिहाज से कट जाता था। लेकिन 50 के दशक में राजमार्ग के निर्माण के बाद पुराना मार्ग पर पूरी तरह खड्ड के रूप में तब्दील हो गया और उस समय चलने वाली बॉर्डर बस सेवा भी 1980 के बाद बंद हो गई। अब बेई नदी के अलावा उज्ज व तरनाह पर भी बीआरओ द्वारा दो पुल बनाए जा रहे हैं।

कठुआ-सांबा की एक लाख से अधिक आबादी को फायदा

ओल्ड सांबा-कठुआ रोड पर पुल के लोकार्पण से कठुआ और सांबा जिले के 300 गांवों की एक लाख से अधिक आबादी को सीधा फायदा मिलेगा। इस मार्ग पर तीन पुलों का शिलान्यास 2016 में हुआ था। दो अन्यों पुलों का निर्माण भी छह माह के भीतर होने की उम्मीद है। तीनों पुल बनने से ओल्ड सांबा-कठुआ रोड को नई पहचान मिलेगी।

शेष दो पुलों पर तेजी से जारी है काम
ओल्ड सांबा-कठुआ रोड पर तरनाह नाले पर बन रहे पुल का 50 फीसद काम पूरा हो गया है। उस पर करीब 10 करोड़ की लागत आने का अनुमान है। चार पिलरों पर बनने वाले पुल की लंबाई 160 मीटर है। वहीं उज्ज दरिया पर बन रहे पुल का 90 फीसद काम पूरा हो चुका है। 18 पिलरों पर बनने एक किलोमीटर लंबे इसा पुल पर करीब 40 करोड़ खर्च आने का अनुमान है।

7.8 करोड़ में बना है ढोक पुल

अखनूर में सीमा के करीब अखनूर-प्लांवाला सड़क पर बना 121 मीटर लंबा ढोक पुल अखनूर व ज्योडिय़ां विधानसभा क्षेत्र के हजारों परिवारों को फायदा होगा। सीमा सड़क संगठन ने इस पुल का निर्माण एक साल में पूरा किया है। इस पुल के निमार्ण पर 7.8 करोड़ रुपये की लागत आई है। सामरिक महत्व के हिसाब से अखनूर काफी महत्वपूर्ण है।

दो बार रद हुआ कार्यक्रम

इन पुलों का लोकार्पण पहले 1 मार्च को किया जाना था लेकिन एयर स्ट्राइक से उपजे तनाव के बाद कार्यक्रम स्थगित कर दिया गया था। फिर 7 मार्च को लोकार्पण का कार्यक्रम तय हुआ लेकिन रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण की व्यस्तता के कारण यह कार्यक्रम भी टालना पड़ा। अंतत: शुक्रवार को ई-उद्घाटन का निर्णय हुआ लेकिन उसमें भी वह शामिल नहीं हो पाईं। ऐसे में केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने नई दिल्ली से इन पुलों का ई-लोकार्पण किया। जितेंद्र सिंह कठुआ से सांसद हैं तो जुगल किशोर जम्मू पुंछ के सांसद हैं।

यह भी थे उपस्थित

दिल्ली में ई उद्घाटन के कार्यक्रम में सीमा सड़क संगठन के डीजी, लेफ्टिनेंट जनरल हरपाल ङ्क्षसह भी डा. जितेंद्र ङ्क्षसह के साथ मौजूद थे। वहीं भाजपा सांसद जुगल किशोर ने शुक्रवार शाम अखनूर के निकट ढ़ोक में दूसरे पुल का उद्घाटन किया। इस मौके पर सीमा सड़क संगठन के अधिकारियों के साथ क्षेत्र के पूर्व विधायक व कई गणमान्य लोग भी मौजूद थे।