नोएडा । उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर में 1981 में हुए लोकसभा के उप चुनाव में सड़क पर पड़ा एक बैलेट पेपर मिला। सूचना इलाके में आग की तरह फैल गई। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के कार्यकर्ता जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचकर नारेबाजी करने लगे और चुनाव में धांधली का आरोप लगाने लगे। तत्कालीन मिर्जापुर के जिलाधिकारी प्रशांत मिश्रा सूचना पाकर तुरंत कार्यालय पहुंचे। यहां आकर पता चला कि भाजपा के कोई बड़े नेता जिलाधिकारी कार्यालय आ रहे हैं। थोड़ी देर में पता चला कि सामने अटल बिहारी वाजपेयी हैं। अटल बिहारी वाजपेयी ने फर्जी बैलेट पेपर के बारे में जानकारी मांगी।

प्रशांत मिश्रा ने अटल बिहारी वाजपेयी को बताया कि सड़क पर मिला पेपर चुनाव प्रक्रिया का हिस्सा नहीं है। वह इस्तेमाल योग्य पेपर नहीं था। जिलाधिकारी की बात ध्यान से सुन अटल उठे और शांतिपूर्वक दरवाजे से बाहर निकल गए।

सेक्टर-40 में रहने वाले उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्य सचिव प्रशांत मिश्रा ने बताया कि कांग्रेस के सांसद अजीज इमाम के अचानक निधन के बाद 1981 में मिर्जापुर में लोकसभा का उप चुनाव कराना पड़ा। उस वक्त वह जिलाधिकारी थे। ऐसे में वह मतदान केंद्रों में जाकर चुनाव व्यवस्था का निरीक्षण कर रहे थे। दोपहर का वक्त था, लंच के लिए वह घर आए। फोन आया कि भाजपा के कार्यकर्ता जिलाधिकारी कार्यालय पर एकत्रित होकर फर्जी बैलेट पेपर छापने का आरोप लगाते हुए कह रहे हैं कि यह चुनाव को प्रभावित करने की कोशिश है। खाना छोड़ आनन-फानन में वह कार्यालय पहुंचे। सबसे पहले चुनाव कार्यालय से संपर्क कर बैलेट पेपर की जानकारी ली गई। पता चला कि जो उस बैलेट पेपर का नंबर और काउंटर फाइल नंबर मैच नहीं कर रहा है। इसका मतलब वह खराब बैलेट पेपर था।

उन्होंने बताया कि तब प्रयागराज के सुरक्षित प्रिंटिग प्रेस में बैलेट पेपर की छपाई होती थी। वहीं, खराब पेपरों की अलग से सूची तैयार की जाती थी। वैसे तो खराब बैलेट पेपरों को लाया नहीं जाता लेकिन कोई आ भी गया तो उन पेपरों की गिनती व समीक्षा कर लॉकर में रख दिया जाता। उन्होंने बताया कि सारी सूचना लेने के बाद चैन की सांस ली।

इतने में सूचना आई कि भाजपा के अखिल भारतीय स्तर के कोई बड़े नेता एक प्रतिनिधिमंडल के साथ बैलेट पेपर की जानकारी लेने आ रहे हैं। थोड़े देर में अटल बिहारी जैसे प्रतिभाशाली व सम्मानित नेता दरवाजे से अंदर आ रहे थे। उनके साथ राजनाथ सिंह भी थे।
उनकी शिकायत सुनने के बाद जिला प्रशासन का पक्ष विस्तृत रूप से उनके सामने रखा गया और बैलेट प्रक्रिया से संबंधित जानकारी भी साझा की गई। उनको बताया कि इस बैलेट पेपर का नंबर काउंटर फाइल के नंबर से मैच नहीं कर रहा है। खराब बैलेट पेपरों की जो सूची बनाई गई, वह भी उनको दिखाई गई। वाजपेयी समझ गए कि जिला स्तर पर कोई गड़बड़ी नहीं है। वह अपनी सीट से उठे और 'यहां कुछ नहीं है' कहते हुए शांतिपूर्वक दरवाजे से बाहर निकल गए।