लंदन । भारत के कई गांवों में लोगों के लिए टॉयलेट की व्यवस्था न होना बड़ी समस्या है, वहीं दुनिया में एक देश में गायों के लिए टॉयलेट बनाए जा रहे हैं। दरअसल नीदरलैंड में गायों के लिए टॉयलेट बनाए जा रहे ताकि देश में अमोनिया से होने प्रदूषण को कम किया जा सके। एक डच वैज्ञानिक हेंक हेन्सकैंप ने गायों के लिए नई यूरिनल डिवाइस बनाई है। बता दें कि खेती के क्षेत्र में विश्व में नीदरलैंड का दूसरा स्थान है। हेंक के फार्म में इस यूरिनल डिवाइस की मदद से रोजाना 15 से 20 लीटर गोमूत्र एकत्रित किया जाता है। उन्होंने एक परीक्षण में पाया था कि गाय के यूरिन से निकलने वाला अमोनिया पर्यावरण को प्रदूषित करता है। हेंक की बनाई डिवाइस खुले मैदान में यूरिन करने के बाद उत्पन्न अमोनिया की मात्रा को आधे से ज्यादा कम कर देती है।
हेंक का कहना है कि यदि पर्याप्त साधन हों तो हम इस समस्या से निपट सकते हैं। हेंक ने कहा कि गाय को यह आदत सिखानी होती है कि वे यूरिन टॉयलेट बॉक्स में ही करें। यदि आप सिखाएं तो गाय टॉयलेट जाना भी सीख जाती हैं। गायों को टॉयलेट की आदत लगाना ठीक अडरली (दूध दुहने वाली डिवाइस) की तरह ही होता है। फिलहाल, इन टॉयलेट्स का परीक्षण पूर्वी डच शहर डोटिनिचेम के पास एक फार्म में किया जा रहा है। यहां 58 में से 7 गाय पहले ही टॉयलेट्स का इस्तेमाल करना सीख गईं। टॉयलेट बॉक्स गायों के पीछे पूंछ के पास रखा जाता है। हेंक की कंपनी का लक्ष्य है कि यह टॉयलेट्स बॉक्स 2020 तक बाजार में आ जाएं और देशभर में इसका इस्तेमाल किया जाने लगे। बात दे कि हेंस की कंपनी खेती से जुड़े दूसरे उपकरण भी बनाती है, जिनकी बाजार में काफी मांग भी है।