अहमदाबाद | कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि केन्द्र की मोदी सरकार ने रेलवे भर्ती परीक्षा की फीस के तौर पर रु. 900 करोड़ की लूट की है| जिसका देश के युवाओं को लोकसभा चुनाव में जवाब देना चाहिए| कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता मनीष दोशी ने कहा कि देश में रेलवे भर्ती बोर्ड़ द्वारा विभिन्न कैडर की भर्ती परीक्षा सरकार के लिए आय का साधन बन चुकी है| मोदी सरकार ने पिछले पांच साल में उन बेरोजगार युवाओं से रु. 900 करोड़ रुपए की लूट चलाई जो रेलवे में नौकरी पाकर अपना भविष्य बनाना चाहते हैं| मोदी सरकार ने सालाना दो करोड़ नौकरियां देने का वादा किया था| जबकि सच्चाई यह है कि वह नौकरी छीनने का काम कर रही है| देश के युवाओं को राहत देने के बजाए मोदी सरकार ने फीस में 850 फीसदी का इजाफा कर बेरोजगार युवाओं की मुश्किलें बढ़ाते हुए उनसे रु. 900 करोड़ की लूट चलाई है| जिसका देश के युवाओं को मौजूदा लोकसभा चुनाव में जवाब देना चाहिए| मनीष दोशी ने कहा कि वर्ष 2013 में रेलवे में नौकरी पाने के इच्छुक युवक-युवतियों से परीक्षा फीस के तौर पर केवल रु. 9 करोड़ वसूले गए थे| जिसके बाद के चार साल में यानी 2018 तक बेरोजगार युवाओं से मोदी सरकार ने 900 करोड़ रुपए वसूल किए हैं| वर्ष 2013 में परीक्षा फीस रु. 60 थी, जिसमें 2016 में मोदी सरकार ने रु. 500 यानी परीक्षा फीस में 850 प्रतिशत की वृद्धि बेरोजगार युवाओं की कमर तोड़ दी| उन्होंने कहा कि रेलवे परीक्षा बोर्ड की शर्त थी कि बेरोजगार परीक्षा देते हैं तो उन्हें रु. 400 वापस कर दिए जाएंगे और जो अनुपस्थित रहेंगे उन्हें परीक्षा फीस वापस नहीं मिलेगी| रेलवे भर्ती बोर्ड ने प्रति साल परीक्षा में वृद्धि की है| 2015 तक एससी-एसटी और महिला उम्मीदवारों से परीक्षा फीस नहीं ले जाती थी, लेकिन मोदी सरकार ने 2018 में रु. 250 फीस वसूल करना शुरू कर दिया| रेलवे परीक्षा बोर्ड द्वारा परीक्षा फीस के नाम पर करोड़ों रुपए का घपला किया जा रहा है|