छपरा. जेपी के गांव में यूपी-बिहार के तीन लोकसभा क्षेत्राें की सियासी हवा टकराती है। दो बिहार के लोकसभा क्षेत्र और एक यूपी के लोकसभा की सीमाएं इसी गांव में आकर एक-दूसरे से जुड़ जाती हैं। सारण, आरा व यूपी के बलिया लोकसभा क्षेत्राें के गांवों के लोग जब एक ही बजार बाबू के डेरा में जुटते हैं, ताे तीनों क्षेत्राें की राजनीति और यूपी-बिहार की सरकारों पर भी खूब बहस होती है। यह उस महानायक जयप्रकाश नारायण की धरती है जहां देश की आजादी की जंग लड़ी गई। यहां आपातकाल के खिलाफ भी संघर्ष हुआ। 

बलिया, सारण और आरा तीन लोकसभा सीटाें में बंटे इस गांव में दो दिन मतदान है। छपरा की सीमा में पड़ने वाले सिताबदियारा में छह मई को मतदान है। बलिया की सीमा में पड़नेवाले जयप्रकाशनगर और आरा की सीमा में खवासपुर में 19 मई को मत पड़ेंगे। छपरा से पूर्व केंद्रीय मंत्री सांसद राजीवप्रताप रूडी तो आरा से सांसद आरके सिंह दोबारा मैदान में हैं। वहीं बलिया से किसान मोर्चा के अध्यक्ष सांसद वीरेंद्र सिंह मस्त प्रत्याशी हैं। उनके सामने हैं सपा के सनातन पांडे। लालू यादव के समधी चंद्रिका राय भाजपा के राजीव प्रताप रूडी को टक्कर दे रहे हैं, आरा में आरके सिंह का सामना माले के राजू यादव से हैं।

राजनीति में रहा ऊंचा नाम, पर विकास में छूटा पीछे

जेपी के गांव वाले मानते हैं कि यह क्षेत्र सबसे पिछड़ा है। तीन भाग में बंटे इस इलाके के यूपी वाले भाग के जयप्रकाशनगर में पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर ने जेपी निवास के पास भव्य जेपी स्मारक बनवाया है, वहीं बिहार वाले सीमा के सिताबदियारा लाला टोला में 2015 में आपातकाल की बरसी पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय जेपी संग्रहालय बनवाया है। यहां सबसे बड़ी समस्या कटान की है। शिक्षक हरेंद्र सिंह बताते हैं कि कटान रोकने के नाम पर यहां करोड़े रुपए की बंदरबांट हुई। जेपी के गांव जाने वाली सड़क के संबंध में भोला सिंह बताते हैं कि बीएसटी बांध की सड़क पर ही यूपी-बिहार के लोग चलते हैं। सड़कों की स्थिति ठीक नहीं है।

यूपी से मिलती है गांवों को बिजली

जेपी का गांव भले ही दो राज्यों और तीन लोकसभा क्षेत्रों में विभाजित है, लेकिन यहां की सुविधाएं अभी भी एक समान है। बिहार के गांवों में बिजली यूपी से ही एक समझौते के तहत प्रदान की गई है। बिहार की ओर से बिजली अपनी सीमा में नहीं पहुंचाई गई है। इसके अलावा सड़क और स्कूल कालेजों में भी दोनों सीमा के लोग एक-दूसरे इलाके में पढ़ते हैं।