नई दिल्लीः लोकसभा चुनाव 2019 (Lok Sabha elections 2019) के प्रचार में पंजाब के अमृतसर पहुंचे केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने पाकिस्तान को कड़ी चेतावनी दी है. नितिन गडकरी ने कहा है कि पाकिस्तान अगर अपनी जमीन पर पनप रहे आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं करता है तो हम वहां जाने वाली नदियों का पानी रोक देंगे. केंद्रीय जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्री  नितिन गडकरी ने कहा, 'भारत की तीन नदियों का पानी पाकिस्तान जाता है. हम उसे रोकना नहीं चाहते हैं. लेकिन भारत और पाकिस्तान के बीच जल संधि का आधार शांतिपूर्ण संबंध और दोस्ती थे जो पूरी तरह से गायब हो गए हैं. पाक करार पर खरा नहीं उतर रहा, इसलिए हम इस संधि का पालन करने के लिए बाध्य नहीं हैं.'

गडकरी ने आगे कहा, 'पाकिस्तान लगातार आतंक का समर्थन कर रहा है. अगर पाकिस्तान आतंकवाद को नहीं रोकता है, तो हमारे पास नदियों का पानी रोकने के अलावा कोई और विकल्प नहीं रहेगा. इसलिए भारत ने आंतरिक रूप से इसका अध्ययन शुरू कर दिया है कि वह पानी हरियाणा, पंजाब और राजस्थान को जाएगा. '  

सिंधु जल समझौता
बता दें कि पाकिस्तान के कराची में 19 सिंतबर 1960 को भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरल लाल नेहरू और पाकिस्तान के तत्कालीन राष्ट्रपति जनरल अयूब खान के बीच सिंधू जल समझौता (Indus Waters Treaty) हुआ था. भारत और पाकिस्तान, सिंधु जल समझौते के तहत सिंधु, रावी, ब्यास, सतलुज, चेनाब और झेलम नदी के पानी का इस्तेमाल करते हैं . सिंधु जल समझौते के तहत भारत रावी, ब्यास और सतुलज नदी के 100 प्रतिशत पानी का इस्तेमाल कर सकता है . इसी तरह झेलम, सिंधु और चेनाब नदियों के अधिकांश पानी को इस्तेमाल करने का अधिकार पाकिस्तान का है . 

वर्तमान स्थिति ये है कि इन सभी 6 नदियों का अधिकतम पानी... पाकिस्तान ही इस्तेमाल कर रहा है . सिंधु जल समझौते के तहत भारत के हिस्से में जो नदियां हैं . भारत उन नदियों के पानी का 100 प्रतिशत इस्तेमाल नहीं कर पा रहा है . 

क्योंकि भारत ने पिछले 71 वर्षों में अपने हिस्से वाली नदियों पर पर्याप्त बांध नहीं बनाए. इसलिए इन नदियों के पानी को भारत Store ही नहीं कर सकता.  वर्ष 2014 में रावी नदी पर भारत ने शाहपुर-कंडी में बांध का निर्माण शुरू किया है . इसके अलावा रावि-ब्यास लिंक का निर्माण भी किया जा रहा है . ताकि भारत अपने हिस्से के पानी का ठीक तरह से इस्तेमाल कर सके.