मथुरा में 90 दिन में 100 से अधिक बंदरों की मौत हो गई. एक साथ दो-तीन बंदरों की मौत से धर्म की नगरी मथुरा में हड़कंप मच गया. लोगों में तरह-तरह की चर्चाएं शुरु हो गईं. शुरुआत में तो बंदरों की मौत को किसी ने भी गंभीरता से नहीं लिया. लेकिन बाद में पशु चिकित्सा विभाग की पहल पर बंदरों का पोस्टमॉर्टम कराया गया तो पता चला कि पानी की कमी से बंदरों की मौत हो रही है.

लेकिन फरवरी में पानी की कमी होने की बात किसी के गले नहीं उतरी. इसी दौरान सामाजिक कार्यकर्ता दीपक पाराशर ने इस संबंध में शिकायत दर्ज कराई. वहीं राष्ट्रपति, पीएम, यूपी के सीएम और जीव-जंतु संरक्षण बोर्ड को पत्र भेज कर मामले की जानकारी की दी. शिकायत दर्ज होने के बाद पुलिस ने भी कार्रवाई करते हुए मृत बंदरों का विसरा जांच के लिए फॉरेंसिक साइंस लैब (एफएसएल), आगरा भेज दिया.

हाल ही में एफएसएल ने अपनी रिपोर्ट प्रशासन को भेजी है. रिपोर्ट में बंदरों की मौत का कारण ज़हर देना बताया गया है. रिपोर्ट से खुलासा हुआ है कि बंदरों को आटे के साथ चूहे मारने वाली दवा मिलाकर दी गई है. जानकार बताते हैं कि इस ज़हर को खाने के बाद तेज प्यास लगती है. पेट में जलन होने लगती है. जहर खाने के कुछ देर बाद ही मौत हो जाती है.

वहीं सामाजिक कार्यकर्ता पाराशर की शिकायत के बाद जल्द ही पेटा की एक टीम मथुरा का दौरा कर सकती है. ये अनुमान लगाया जा रहा है कि जिन इलाकों में बंदरों की मौत हुई है वहां उनकी संख्या अच्छी खासी है. हो सकता है कि बंदरों से परेशान होकर किसी ने उन्हें ज़हर देना शुरु कर दिया है.