रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के मध्यप्रदेश के चुनावी दौरे से लौटने के बाद पूर्व मुख्य सचिव अजय सिंह और तत्कालीन कृषि संचालक प्रताप राव कृदत्त के खिलाफ जांच का फैसला हो जाएगा। कृषि विभाग ने फसल बीमा में गड़बड़ी के मामले में जांच की फाइल को जीएडी को भेज दिया है।

कृषि विभाग के एसीएस केडीपी राव ने जांच की अनुशंसा के साथ शुक्रवार को फाइल सामान्य प्रशासन विभाग को भेज दी है। लोक प्रहरी रमाशंकर गुप्ता ने ईओडब्ल्यू को लिखित शिकायत की थी कि तात्कालीन कृषि उत्पादन आयुक्त अजय सिंह और कृषि संचालक प्रताप कृदत्त ने राज्य स्तरीय फसल बीमा समन्वय समिति के जरिए बजाज एलायंस जैसी बीमा कंपनियों से मिलीभगत कर राजकोष एवं निविदा प्रक्रिया में मनमानी की है।
साथ ही बैंक और सहकारी समितियों के प्रबंधकों से मिलीभगत कर बोये रकबे से अधिक रकबे का बीमा प्रीमियम किसानों की बिना सहमति के आहरित कर लिए गए। इसमें दोनों अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध है।

ईओडब्ल्यू ने दोनों अधिकारियों के खिलाफ जांच के लिए शासन से अनुमति मांगी थी। ईओडब्ल्यू आइजी जीपी सिंह ने कृषि उत्पादन आयुक्त केडीपी राव को पत्र लिखकर अनुमति मांगी थी। दोनों अधिकारी आईएएस हैं, ऐसे में शासन की अनुमति के बिना जांच नहीं हो सकती है।
मुख्यमंत्री की अनुमति मिलने के बाद दोनों अधिकारियों के खिलाफ जांच शुरू हो जाएगी। छत्तीसगढ़ में ऐसा पहली बार हो रहा है, जब किसी पूर्व मुख्य सचिव के खिलाफ जांच के लिए अनुमति मांगी जा रही है। अजय सिंह को भाजपा सरकार ने विवेक ढांड के वीआरएस लेने के बाद मुख्य सचिव के पद पर बिठाया था।

सबसे पहले राजनांदगांव में पकड़ी गई थी गड़बड़ी 
रमाशंकर गुप्ता ने बताया कि फसल बीमा में बिना खेती की जमीन का बीमा करने का सबसे पहले खुलासा राजनांदगांव जिले में किया गया था। पूर्व मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह से इस मामले की शिकायत की गई, लेकिन अधिकारियों ने जांच में गड़बड़ी करके बीमा कंपनी को बचाने का काम किया। इसके बाद इसी तरह की गड़बड़ी कोरिया जिले में हुई।