विश्व मेडिकल असोसिएशन (डब्ल्यूएमए) ने कहा है कि महिला ऐथलीटों के वर्गीकरण को लेकर आईएएएफ के नए विवादास्पद लैंगिक नियमों को लागू नहीं करना चाहिये। डब्ल्यूएमए ने कहा कि अगर ऐसा किया जाता है तो यह एक अपराध होगा। दक्षिण अफ्रीका की महिला धाविका कास्टर सेमेन्या ने पिछले हफ्ते ऐथलेटिक्स महासंघों के अंतरराष्ट्रीय संघ (आईएएएफ) के कुछ महिलाओं को टेस्टोस्टेरोन का स्तर कम करने के लिए बाध्य करने की योजना के खिलाफ अदालत में मामला गंवा दिया था।
खेल पंचाट के फैसले का मतलब है कि अगर अधिक टेस्टोस्टेरोन के स्तर वाली महिला ऐथलीटों को कुछ स्पर्धाओं में महिलाओं के रूप में हिस्सा लेना है तो उन्हें टेस्टोस्टेरोन के स्तर को कम करने के लिए उपचार कराना होगा। आईएएएफ का मानना है कि दो बार की ओलिंपिक चैंपियन सेमेन्या के जैसी ऐथलीटों को टेस्टोस्टेरोन की अधिकता से अन्य ऐथलीटों के मुकाबले फायदा मिलेगा जो सही नहीं रहेगा। वहीं दूसरी ओर डब्ल्यूएमए के अध्यक्ष फ्रेंक उलरिच मोंटगोमेरी ने डाक्टरों से कहा है कि वे इस नियम को लागू करने में आईएएएफ का साथ नहीं दें। उन्होंने कहा, ‘अगर अंतरराष्ट्रीय खेल नियमावली डॉक्टरों को खिलाड़ियों को उनके शरीर के सामान्य हालात को कम करने के लिए औषधि देने के लिए कहती है तो यह बेहद गंभीर स्थिति होगी।’ इसमें डॉक्टरों को अपनी भूमिका नहीं रखनी चाहिये।