महान बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर, पूर्व कप्तान सौरव गांगुली और बल्लेबाज वीवीएस लक्ष्मण ने हितों के टकराव के मामले को खारिज करते हुए बीसीसीआई पर ही नाराजगी जाहिर की है। इनका कहना है कि वे बोर्ड से किसी प्रकार की राशि नहीं ले रहे हैं और केवल भारतीय क्रिकेट की भलाई के लिए ही बोर्ड के अनुरोध पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। सचिन ने कहा कि इन हालातों के लिए बीसीसीआई ही जिम्मेदार है। उनका कहना है कि वह क्रिकेट सलाहकार समिति (सीएसी) के सदस्य के साथ ही मुंबई इंडियन्स के ‘आइकन’ होने के कारण दोहरी भूमिका निभा रहे हैं जो हितों के टकराव का मामला बताया जा रहा है।  सचिन ने कहा कि उसे सीएसी सदस्य बनाने का फैसला स्वयं बीसीसीआई ने ही लिया था और अब वे ही इसे हितों के टकराव का मामला बता रहे हैं जबकि फैसले लेने में उनकी कोई भूमिका नहीं रही है और न ही उन्होंने कोई आर्थिक लाभ लिया है। तेंदुलकर ने इस मामले में बीसीसीआई के लोकपाल और नैतिक अधिकारी डीके जैन को अपना जवाब सौपा है जिसमें उन्होंने निवेदन किया है कि प्रशासकों की समिति (सीओए) और मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) को बुलाकर इस मसले पर उनकी स्थिति स्पष्ट की जाए। 
इससे पहले सीएसी के तीनों सचिन, सौरव गांगुली और वीवीएस लक्ष्मण को लोकपाल जैन ने नोटिस जारी किया था लेकिन तीनों ने अपने हलफनामे में हितों के टकराव के आरोपों को खारिज कर दिया था। तेंदुलकर और लक्ष्मण को मध्य प्रदेश क्रिकेट संघ (एमपीसीए) के सदस्य संजीव गुप्ता द्वारा दायर की गई शिकायत पर नोटिस भेजा गया था। तेंदुलकर को हालांकि बीसीसीआई के मुख्य कार्यकारी के उस पत्र पर आपत्ति है जो उन्होंने शिकायतकर्ता को लिखा है। इस पत्र में गांगुली की तरह तेंदुलकर के मामले को भी समाधान योग्य हितों का टकराव बताया गया है।