कहते हैं सियासत में न कोई स्थायी दोस्त होता है और न ही दुश्मन. इसी कहावत को चरितार्थ करते हुए समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव बसपा सुप्रीमो मायावती के साथ सोमवार को गाजीपुर में माफिया डॉन मुख्तार अंसारी के भाई अफजाल अंसारी के लिए वोट मांगेंगे. अफजाल अंसारी को बसपा ने गाजीपुर से प्रत्याशी बनाया है.

अखिलेश यादव उसी अंसारी बंधुओं के लिए आज वोट मांगते नजर आएंगे, जिसकी वजह से समाजवादी पार्टी और यादव कुनबे में रार पैदा हुई थी. दरअसल 2017 के विधानसभा चुनाव से पहले शिवपाल यादव ने कौमी एकता दल का सपा में विलय करवाया था. जिसका अखिलेश यादव ने विरोध करते हुए ख़ारिज कर दिया था. यहीं से अखिलेश यादव और शिवपाल यादव में कटुता शुरू हुई. आलम यह हुआ कि शिवपाल यादव को अलग पार्टी बनानी पड़ी.

2016 में शिवपाल यादव ने अखिलेश की इच्छा के खिलाफ जाते हुए एक प्रेस कांफ्रेंस आयोजित कर कौमी एकता दल का सपा में विलय करवाया था. हालांकि सपा संसदीय दल में इस विलय के प्रस्ताव का नामंजूर कर दिया गया. यहीं से अखिलेश और शिवपाल के बीच दरार पैदा हुई. इतना ही नहीं अखिलेश यादव इस विलय में मुख्य भूमिका निभाने वाले में मुलायम के करीबी कैबिनेट मंत्री बलराम यादव को भी निकाल दिया था. जिसके बाद अफजाल अंसारी ने अखिलेश यादव पर सपा को हाईजैक करने का आरोप लगाया था और उन्होंने बसपा का दमन थाम लिया था.

हालांकि अब अखिलेश यादव गाजीपुर में होने वाली संयुक्त रैली में शामिल होंगे. सपा के जिलाध्यक्ष नन्कहू यादव ने उनकी मौजूदगी की पुष्टि की है. ऐसा इसलिए हो रहा है ताकि गठबंधन में एकता का सन्देश जाए और विरोधी इसका फायदा न उठा सकें.