लोकसभा चुनाव में 19 मई को अंतिम चरण की 59 सीटें ये तय करेंगी कि देश का भविष्य कैसा होगा? क्योंकि इन सीटों पर बीजेपी के सामने जहां उत्तर प्रदेश , बिहार, झारखंड, और हिमाचल में अपना किला बचाने की चुनौती है, वहीं पश्चिम बंगाल में ममता के किले में सेंध लगाए बिना बीजेपी के लिए सत्ता में वापसी का राह मुश्किल है. इन सीटों पर सबसे ज्यादा प्रभावित करने वाला फैक्टर महिलाओं का है. सबसे पहले बात पश्चिम बंगाल की, जहां प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह का सीधा मुकाबला ममता बनर्जी से है. अंतिम चरण में पश्चिम बंगाल की जिन 9 सीटों पर वोट डाले जाने हैं, वहां बीजेपी को अपना खाता खोलने की चुनौती है.

बीजेपी का शीर्ष नेतृत्व पिछले 2 सालों से किसी भी कीमत पर बंगाल फतह करना चाह रहा है. उसे उम्मीद है कि उत्तर प्रदेश में गठबंधन के कारण जो सीटें कम होंगी, उनकी भरपाई पश्चिम बंगाल से हो जाएगी. लेकिन ममता से मुकाबला इतना आसान नहीं है. इस बात का अंदाजा दोनों दलों के नेताओं की बयानबाजी से लगाया जा सकता है.

पश्चिम बंगाल के बाद बात उत्तर प्रदेश की करें तो यहां पर भी बीजेपी का मुकाबला एक महिला से ही है, गठबंधन में भले ही एसपी-बीएसपी दो पार्टियां हों, लेकिन जब बात दिल्ली की गद्दी की आती है तो मायावती का नाम अपने आप आगे आ जाता है. अंतिम चरण की जिन 13 सीटों पर वोट डाले जाने हैं, उनमें मायावती का वोट बैंक ये तय करेगा कि बीजेपी अपनी 13 सीटों में कितनी बचा पाती है? बीजेपी की ओर से भी इस इलाके में मोदी-अमित शाह की जोड़ी के साथ एक महिला खड़ी है और वो महिला हैं केन्द्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल.

अंतिम चरण की जिन 13 सीटों में से 2 सीट अपना दल (सोनेलाल पटेल) के पास है. ये इलाका पटेल वोट बैंक वाला है. ऐसे में अनुप्रिया के जिम्मे भी पटेल वोट बैंक को बीजेपी में ट्रांसफर कराने की बड़ी जिम्मेदारी है. बिहार में भी अंतिम चरण आते-आते आरजेडी के प्रचार का जिम्मा राबड़ी देवी ने सम्भाल लिया है. राबड़ी देवी ट्विटर के जरिए लगातार नीतीश कुमार और बीजेपी पर हमले कर रही हैं. पंजाब में जिन 13 सीटों पर मतदान है, उनमें बीजेपी सिर्फ 10 पर चुनाव लड़ रही है, जबकि चंडीगढ़ में भी बीजेपी ने किरण खेर पर दांव लगाया है.