मुंबई । आर्थिक समस्याओं से जूझते हुए अस्थाई रूप से बंद हुई जेट एयरलाइंस के उपमुख्य कार्यकारी और मुख्य वित्तीय अधिकारी अमित अग्रवाल ने मंगलवार को अपने पद से त्यागपत्र दे दिया। उन्होंने कहा, 'मैं सूचित करना चाहता हूं कि मैं व्यक्तिगत कारणों से अपनी सेवाओं से त्यागपत्र दे रहा हूं।' मालूम हो कि अप्रैल से ही जेट एयरवेज का संचालन बंद हो गया है। कई महीनों से पायलट और अन्य कर्मचारियों की वेतन न दे पाने की वजह से भी एयरलाइन लंबे समय से संकट में घिरी थी। जेट एयरवेज के बंद होने की वजह से हजारों कर्मचारियों को नौकरी गंवानी पड़ी। जेट की हिस्सेदारी खरीदने से भी कंपनियां परहेज कर रही हैं। हालांकि जेट के ही अंतरराष्ट्रीय सहयोगी एतिहाद ने हिस्सेदारी खरीदने की इच्छा जताई है। एतिहाद ने कहा है कि वह जेट में 1700 करोड़ रुपये का निवेश कर सकती है। एतिहाद ने जेट की उधारी चुकाने के बारे में कोई वादा नहीं किया है। पिछले शुक्रवार को जेट के लिए बोली लगाने की समयसीमा खत्म हो गई और तब तक सिर्फ एतिहाद ने ही बोली लगाई थी। उसने डेडलाइन खत्म होने से कुछ मिनट पहले ही बोली सौंपी थी। उसके अलावा जेट की खातिर नेशनल इनवेस्टमेंट एंड इंफ्रास्ट्रक्चर फंड (एनआईआईएफ), टीपीजी कैपिटल और इंडिगो पार्टनर्स को चुना गया है। जेट को अभी कम से कम 15 हजार करोड़ के निवेश की जरूरत है। जेट एयरवेज को बैंकों ने भी मदद देने से हाथ खड़े कर दिए थे। जेट को कर्ज देने वाले बैंकों में से एक के अधिकारी ने बताया कि अगर यह तफ्तीश मुकम्मल जांच में बदलती है तो किसी वनटाइम डेट सेटलमेंट की संभावना खत्म हो सकती है या उसमें देरी हो सकती है। जेट पर कुल 8,500 करोड़ का कर्ज है।