इन्दौर । समाज और शिक्षा के क्षेत्र में श्रेष्ठ संस्कारों के प्रत्यारोपण एवं अपनी विशिष्ट सेवाओं के लिए भारत सरकार द्वारा पद्मभूषण सम्मान से अलंकृत जैनाचार्य श्री रत्नसुंदर सूरीश्वर म.सा. लगभग 35 साधु-साध्वी भगवंतों के साथ 15 वर्षों के अंतराल के बाद आगामी 26 मई से पधार रहे हैं। दशहरा मैदान पर 26 मई से 2 जून तक आचार्यश्री के सान्निध्य में दिव्य सत्संग का आयोजन प्रतिदिन प्रातः 8.45 से 10.15 बजे तक होगा। ‘परिवर्तन प्रवचनमाला’ शीर्षक इस कार्यक्रम में प्रतिदिन आम लोगों के जीवन से जुड़े ज्वलंत विषयों पर आचार्यश्री के प्रेरक आशीर्वचन होंगे। दशहरा मैदान पर हजारों भक्तों के लिए बैठक व्यवस्था एवं भव्य शामियाने सहित विभिन्न प्रबंध किए जा रहे हैं। 
आयोजन समिति के कांतिलाल बम, अशोक लोढा, प्रेमचंद कटारिया एवं सुरेश डोसी ने बताया कि प्रवचनमाला का शुभारंभ रविवार 26 मई को सुबह 7.30 बजे इंद्रलोक कालोनी आरटीओ रोड स्थित सर्वधर्म मंदिर से दशहरा मैदान तक भव्य शोभायात्रा के साथ होगा। आचार्यश्री सहित सभी साधु-साध्वी भगवंत एवं शहर के सभी समाजों के प्रमुख भी इस शोभायात्रा में शामिल होंगे। प्रवचनमाला में पहले दिन रविवार को ‘रास्ता जो राम की ओर ले जाए’, सोमवार 27 मई को ‘मूल्यों की मार्केट वैल्यू’, मंगलवार 28 मई को ‘आक्रोश के आतंक से आजादी’, बुधवार 29 मई को ‘प्यार ही है परिवार का आधार’, गुरूवार 30 मई को ‘सस्कार संवारें जिंदगी’, शुक्रवार 31 मई को ‘हर उलझन का एक समाधान’, शनिवार 1 जून को ‘धन्यवाद मिटा देता है विवाद’ एवं रविवार 2 जून को ‘कथा कृष्ण के कौशल की’ जैसे सामयिक एवं दिलचस्प विषयों पर आचार्यश्री के प्रवचनों की अमृत वर्षा होगी। व्याख्यानमाला में शहर के सभी धर्म एवं समाजों के प्रतिनिधि तथा आम नागरिक भी उपस्थित रहकर इसका लाभ उठा सकेंगे। आचार्यश्री ने गृहस्थ जीवन उपयोगी अनेक पुस्तकों का लेखन भी किया है और देश की शिक्षा व्यवस्था के प्रति उनका विशिष्ट दृष्टिकोण सभी धर्मों एवं समाजों के लिए सम्मानीय माना जाता है। देश में हजारों लोग आचार्यश्री के क्रांतिकारी प्रवचनों से लाभान्वित होकर समाज एवं परिवार की मुख्य धारा में जुड़ चुके हैं। भारत सरकार ने उनकी समाजसेवा एवं विशिष्ट उपलब्धियों के लिए पद्मभूषण जैसे शीर्ष सम्मान से अलंकृत किया है। आयोजकों ने शहर के नागरिकों से आग्रह किया है कि वे किशोर उम्र के बच्चों एवं परिवार के सभी सदस्यों सहित इस प्रवचनमाला का पुण्य लाभ उठाएं।