लखनऊ: लोकसभा चुनाव के सातवें और अंतिम चरण में उत्तर प्रदेश की 13 सीटों के लिए चुनाव प्रचार शुक्रवार शाम पांच बजे समाप्त हो गया. इन सभी सीटों पर मतदान रविवार को होगा. इस चरण में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, केंद्रीय मंत्रियों में मनोज सिन्हा, अनुप्रिया पटेल, और बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष डॉ़ महेंद्र नाथ पांडेय, पूर्व मंत्री आरपीएन सिंह और भोजपुरी फिल्म अभिनेता रविकिशन सहित कई दिग्गजों की राजनीतिक किस्मत का फैसला होगा. 

अंतिम चरण में 19 मई को जिन सीटों पर वोटिंग होनी है, उनमें महराजगंज, गोरखपुर, बांसगांव, घोसी, कुशीनगर, देवरिया, सलेमपुर, वाराणसी, बलिया, गाजीपुर, चंदौली, राबर्ट्सगंज और मीर्जापुर शामिल हैं. इन 13 संसदीय सीटों पर 2.32 करोड़ मतदाता हैं जो 167 उम्मीदवारों की किस्मत का फैसला करेंगे. इस में चरण के लिए कुल 13979 मतदान केंद्र और 25874 मतदान बूथ बनाए गए हैं. अब उम्मीदवार घर-घर जाकर चुनाव प्रचार कर सकेंगे. मतगणना 23 मई को होगी.

वाराणसी से पीएम मोदी के खिलाफ 25 प्रत्याशी मैदान में
वाराणसी सीट से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ 25 प्रत्याशी मैदान में हैं. हालांको कोई प्रत्याशी उनसे सीधा टक्कर लेते नहीं दिख रहा. यहां से पहले कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी के लड़ने की चर्चा थी. लेकिन बाद में काग्रेस ने अपने पुराने प्रत्याशी अजय राय को टिकट दे दिया. गठबंधन (सपा) ने बीएसएफ के बर्खास्त जवान तेज बहादुर यादव को उम्मीदवार बनाया था, लेकिन उनका पर्चा रद्द होने के बाद शालिनी यादव को प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं. वाराणसी में प्रधानमंत्री के चुनाव मैदान में होने से आस-पास की सीटों पर लाभ मिलने की बीजेपी को उम्मीद है. वाराणसी में पीएम मोदी के जीत के अंतर को लेकर चर्चा जोरों पर है. 

गोरखपुर में रविकिशन के सामने गठबंधन की चुनौती
गोरखपुर लोकसभा सीट को बीजेपी का गढ़ कहा जाता है. यह सीट पिछले लगभग 29 सालों से बीजेपी के पाले में रही है. लेकिन 2018 में हुए उपचुनाव में समाजवादी और बहुजन समाज पार्टी गठबंधन के प्रत्याशी प्रवीण निषाद ने इस सीट पर जीत दर्ज कराई थी. इस बार बीजेपी ने यहां से भोजपुरी फिल्मों के अभिनेता रविकिशन को उम्मीदवार बनाया है. 

गठबंधन ने यहां से रामभुआल निषाद को मैदान में उतारा हैं. रामभुआल प्रदेश सरकार में राज्यमंत्री और दो बार विधायक रहे हैं. पिछड़ों के बीच मजबूत पकड़ वाले नेता रामभुआल बीजेपी को कांटे की टक्कर दे रहे हैं. कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ रहे मधुसूदन त्रिपाठी मुकाबले को त्रिकोणीय बनाने में जुटे हैं. बीजेपी मोदी के नाम, योगी के काम और गोरखपुर की दो साल में हुई तरक्की की बुनियाद पर चुनाव लड़ रही है. जबकि गठबंधन ने जातिगत समीकरण की मजबूत गोट बिछा रखी है. इस सीट पर मुख्यमंत्री योगी की भी प्रतिष्ठा दांव पर है. 

चंदौली में यूपी बीजेपी अध्यक्ष की राह मुश्किल
चंदौली में यूपी बीजेपी अध्यक्ष डॉ महेंद्र नाथ पांडेय 2014 में भले मोदी लहर में जीत गए हों, लेकिन इस बार उनकी राह आसान नहीं दिख रही है. बनारस जिले की दो विधानसभा सीटों को शामिल कर बने इस संसदीय क्षेत्र से सपा ने संजय चौहान को उम्मीदवार बनाया है. कांग्रेस ने पूर्व मंत्री बाबू सिंह कुशवाहा की पत्नी शिवकन्या कुशवाहा को मैदान में उतारा है. पांडेय को सपा-बसपा गठबन्धन से चुनौती मिल रही है. लेकिन गठबंधन में स्थानीय कलह और पांडेय द्वारा कराए गए कार्य उनको मजबूती दे रहे हैं.

मिर्जापुर में त्रिकोणीय मुकाबला
अनुप्रिया पटेल मिर्जापुर लोकसभा सीट से चुनाव लड़ रही हैं, जहां से गठबंधन सपा के टिकट पर राजेंद्र एस. बिंद चुनाव मैदान में हैं. कांग्रेस ने ललितेश पति त्रिपाठी को उम्मीदवार बनाया है. इसी चरण में कुशीनगर से पूर्व पूर्व केंद्रीय मंत्री आरपीएन सिंह की किस्मत का भी फैसला होना है. यहां से बीजेपी ने विजय दुबे को टिकट दिया है, जबकि गठबंधन की तरफ से सपा के नथुनी प्रसाद कुशवाहा चुनाव मैदान में हैं.