नई दिल्‍ली: फ्लाइट लेफ्टिनेंट भावना कांत भारतीय वायुसेना की पहली ऑपरेशनल फ़ाइटर पायलट बन गई हैं. उन्होंने फ़ाइटर एयरक्राफ्ट में दिन में उड़ान भरने की ट्रेनिंग पूरी कर ली है. इसका अर्थ है कि अब फ्लाइट लेफ्टिनेंट भावना कंत किसी हवाई युद्ध में शामिल हो सकती हैं. फ्लाइट लेंफ्टिनेंट भावना नवंबर 2017 में फाइटर पायलट के तौरपर वायुसेना में शामिल हुई थीं और उन्होंने मार्च 2018 में मिग-21 बायसन एयरक्राफ्ट में पहली अकेली (SOLO) उड़ान भरी थी.

फ्लाइट लेफ्टिनेंट भावना वायुसेना में शामिल होने वाली महिलाओं के पहले बैच की सदस्य हैं. राजस्थान में पाकिस्तान की सरहद से लगने वाले एक फॉरवर्ड एयरबेस पर तैनात भावना अब आसमान में अपने जौहर दिखाने के लिए तैयार हैं.


भावना के अलावा अवनि चतुर्वेदी और मोहना सिंह भी पहले बैच की फाइटर पायलट हैं, जो अलग-अलग एयरबेसों में अपनी ट्रेनिंग के आखिरी दौर में हैं. किसी फाइटर पायलट को युद्ध में उतरने से पहले ट्रेनिंग की लंबी प्रक्रिया से गुज़रना पड़ता है. एयरफोर्स अकादमी में बेसिक ट्रेनर पर उड़ान भरने की ट्रेनिंग के बाद उन्हें एडवांस जेट ट्रेनर हॉक पर उड़ान का प्रशिक्षण लेना होता है. इसके बाद वायुसेना में शामिल होने के बाद किसी फाइटर जेट पर ट्रेनिंग का दौर शुरू होता है.

सबसे पहले ट्रेनर एयरक्राफ्ट में किसी सीनियर के साथ उड़ान भरने के शुरुआती सबक लिए जाते हैं. इसके बाद अकेले उड़ान भरने का मुश्किल पड़ाव आता है. इसके बाद दिन और फिर रात में उड़ान भरने और हमला करने की ट्रेनिंग की बारी आती है. लेकिन एक बार दिन में उड़ान और हमले की ट्रेनिंग पूरी होते ही पायलट पूरी तरह ऑपरेशनल पायलट बन जाता है यानि उसका कमांडिंग अफसर उसे युद्ध में भेज सकता है.

भारतीय वायुसेना में कुल 94 महिला पायलट हैं, लेकिन ये मिग, मिराज, जेगुआर या सुखोई जैसे फाइटर एय़रक्राफ्ट नहीं उड़ातीं. महिला पायलट हेलीकॉप्टर और परिवहन एयरक्राफ्ट पर ही तैनात की जाती हैं. लेकिन महिला फ़ाइटर पायलटों को मौका देकर भारतीय वायुसेना देश की पहली ऐसी सशस्त्र सेना बन गई, जिसने महिलाओं को सीधे मोर्चे पर उतार दिया. वायुसेना में कुल 1500 महिलाएं अफसर हैं जो शिक्षा, इंटेलीजेंस, लीगल, कम्यूनिकेशन जैसे अलग-अलग विभागों में काम कर रही हैं.