पंजाब, राजस्थान की धरती प्यासी है। पानी के अभाव में पशु-पक्षियों का भी बुरा हाल है, किसानों की फसलें सूख रही हैंं, और सतलुज दरिया का हजारों क्यूसिक पानी हुसैनीवाला हेड से यूं ही पाकिस्तान को छोड़ा जा रहा है। वह भी तब जबकि भारत द्वारा पाकिस्तान को पानी जाने से रोकने के लिए साढ़े चार महीने तक गेटों की मरम्मत की गई। अब जबकि दरिया में पानी ऊपर से आ रहा है तो नहरी विभाग के पास न तो उस पानी के स्टोरेज की कोई व्यवस्था है, और न ही नहरों के माध्यम से खेत-खलिहानों तक पहुंचाने की।

हुसैनीवाला हेड के गेटों की मरम्मत के दौरान पानी का प्रवाह हरिके हेड से रूकवाकर अधिकारियों ने दावा किया था कि बारिश को छोड़कर सामान्य दिनों में अब सतलुज दारिया का पानी पाकिस्तान को नहीं जाएगा। अब इस पानी का प्रयोग पंजाब व राजस्थान की कृषि योग्य जमीनों को सींचित करने में होगा। अब जबकि दरिया में पानी आ गया है तो यह व्यर्थ बह रहा है। 

अधिकारी कह रहे हैंं कि इस्टर्न व बीकानेर कनाल में सफाई का काम चल रहा है, जिससे दस जून के बाद ही नहरों में पानी छोड़ा जाएगा। ऐसे में बड़ा सवाल उठता है कि विभाग ने उस समय नहरों की सफाई क्यों नहीं करवाई जब गेटों की मरम्मत के नाम पर दरिया में पानी का प्रवाह ऊपर से बंद करवाया गया था। यहीं नहीं, हेड की जल ग्रहण क्षमता में जमी बड़े पैमाने पर साल्ट को भी नहीं हटाया गया। अगर इसे हटाया गया होता तो पाकिस्तान को पानी जाने से रोका जा सकता था।

 

 

नहरी विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि भारत सरकार की मंशा को देखते हुए गेटों की मरम्मत का काम करवाया गया था, लेकिन इसकी कोई ठोस रणनीति तैयार नहीं हो पाई थी कि जब हम पाकिस्तान को पानी छोड़े जाने से रोकेगें तो उस पानी क्या करेगे। उन्होंने कहा पिछले कई सालों से देखा जा रहा था कि जून के महीने में नदी सूख जाती है, लेकिन इस बार पौंग व भाखड़ा बांध से पानी छोड़ा जा रहा है, जिससे दरिया के हिस्से में पानी अपेक्षाकृत ज्यादा दिखाई दे रहा है।

 

 

उन्होंने बताया कि मंगलवार को चार हजार क्यूसिक पानी पाकिस्तान को छोड़ा जा रहा था। हरिके हेड के एक्सईन राजीव गोयल ने बताया कि हेड से डाउन में पांच हजार क्यूसिक पानी छोड़ा जा रहा है, उन्होंने बताया कि हेड में जल की अधिकता होने पर ही डाऊन में पानी छोड़ा जा रहा है।

 

दारिया में छोड़े जाने से डूबी धान की नर्सरी

हरिके हेड से डाउन में पानी छोड़े जाने से सैकड़ों हेक्टयर क्षेत्रफल में खड़ी धान की नर्सरी पानी में डूब गई। ऐसे में यदि जल्द खेतों से पानी नहीं हटता है तो धान की नर्सरी के खराब होने की आशंका है। ऐसे में बहुत से किसानों के लिए धान की रोपाई कर पाना मुश्किल भरा है। हालांकि जिन खेतों या क्षेत्रों में दरिया का पानी भरा है वह दरिया के तलहटी वाले हिस्से हैंं।