इतिहास में प्राचीन मानव संस्कृति, पुरानी सभ्यता, खंडहरों, उनकी गतिविधियों, प्राचीन सिक्के, बर्तन, चमड़े की किताबें, भोजपत्र पर लिखित पुस्तकें, शहरों के खंडहर या फिर पुराने किले, और हर प्रकार के प्राचीन अवशेष, वस्तुओं से जुड़े कई क्षेत्र में करियर के विकल्प हैं। ऑर्कियोलॉजिकल मॉन्यूमेंट्स, आर्ट्स एंड क्राफ्ट्स, कॉइन, सील, बीड, लिट्रेचर और नेचुरल फीचर्स के संरक्षण और प्रबंधन का कार्य भी हतिहास से ही जुड़ा है। यही नहीं  पांडुलिपियों, और अभिलेखों संरक्षित और संगृहीत करने जैसे काम भी इसी से जुड़े हैं।
एमए के बाद करें ये कोर्स : पोस्ट ग्रेजुएशन के बाद एमफिल और पीएचडी भी की जा सकती है। इसके अलावा आर्कियोलॉजी, म्यूजियोलॉजी, आर्काइवल स्टडीज में डिप्लोमा और शॉर्ट-टर्म कोर्स भी किया जा सकता है। इतिहास में करियर बनाने के लिए आप विशेष कोर्स भी कर सकते हैं। स्पेशलाइजेशन कोर्स जैसे आर्काइव्स मैनेजमेंट, हेरिटेज मैनेजमेंट करने के बाद आर्कियोलॉजिस्ट बनने की राह आसान होती है।
यहां हैं नौकरियां : म्यूजियम क्यूरेटर, हेरिटेज मैनेजर, कंजर्वेशन ऑफिसर, म्यूजियम एग्जीबिशन ऑफिसर, स्कूल टीचर, लाइब्रेरियन, आर्कियोलॉजिस्ट, आर्किविस्ट, जर्नलिस्ट बनने के लिए इतिहास विषय का बड़ा योगदान है। 
इसके अलावा आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया , विदेश मंत्रालय के हिस्टोरिकल डिवीजन, शिक्षा मंत्रालय, भारतीय राष्ट्रीय अभिलेखागार, विश्वविद्यालयों आदि में भी नौकरी के बेहतर विकल्प उपलब्ध हैं। 
सरकारी नौकरी की बात करें तो सरकारी म्यूजियम, गैलरी, आर्म्ड फोर्सेज, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, उच्च शिक्षण संस्थान, पब्लिशिंग कंपनी, हेरिटेज ऑर्गेनाइजेशन, नेशनल पार्क सर्विसेज आदि कई ऐसे प्राइवेट संस्थान में भी नौकरी के कई अवसर हैं।