नई दिल्ली । देश 2022 तक अक्षय ऊर्जा उत्पादन में वर्तमान के मुकाबले काफी बेहतर स्थिति में आ जाएगा। केंद्रीय  बिजली मंत्री आरके सिंह ने भरोसा जताया है कि 2022 तक 1,75,000 मेगावाट अक्षय ऊर्जा उत्पादन का लक्ष्य हासिल हो जाएगा। नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय की भी जिम्मेदारी संभाल रहे सिंह ने कहा कि 80,000 मेगावाट अक्षय ऊर्जा क्षमता स्थापित की जा चुकी है जबकि 24,000 मेगावाट पर काम जारी है। उन्होंने कहा, ‘कुल मिलाकर स्थापित क्षमता 80,000 मेगावाट के स्तर पर पहुंच गई है। इसके अलावा 24,000 मेगावाट पर काम जारी है। 42,000 मेगावाट के लिये बोलियां विभिन्न चरणों में हैं। यह 1,46,000 मेगावाट बैठता है और हमारा लक्ष्य 1,75,000 मेगावाट है।’ सिंह ने जोर देकर कहा, ‘हम इस लक्ष्य को हासिल करेंगे।’ 
अपनी प्राथमिकताओं के बारे में उन्होंने कहा कि सरकार के लक्ष्यों को हासिल करना उनकी शीर्ष प्राथमिकता होगी। सरकार ने 2022 तक नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों से 1,75,000 मेगावाट क्षमता स्थापित करने का लक्ष्य रखा है। इसमें 1,00,000 मेगावाट सौर ऊर्जा तथा 60,000 मेगावाट पवन ऊर्जा के जरिये प्राप्त करने का लक्ष्य है। इसके अलावा 10,000 मेगावाट जैव ऊर्जा तथा 5,000 मेगावाट लघु पनबिजली परियोजनाओं से प्राप्त करने का लक्ष्य है। हालांकि कई शोध रिपोर्ट में आगाह किया गया है कि भारत के पवन और सौर ऊर्जा लक्ष्य हासिल करना मुश्किल है। फिच सोल्यूशंस मैक्रो रिसर्च ने एक रिपोर्ट में कहा कि भारत 2022 तक 54,700 मेगावाट पवन ऊर्जा क्षमता स्थापित कर सकता है जबकि लक्ष्य 60,000 मेगावाट है। एजेंसी ने कह कहा कि इसका कारण जमीन अधिग्रहण से जुड़े मुद्दे तथा ग्रिड संबंधी बाधा हैं। इससे क्षेत्र में परियोजना क्रियान्वयन में विलम्ब होगा। मरकॉम इंडिया रिसर्च ने भी अपनी रिपोर्ट में कहा कि 2022 तक 71,000 मेगावाट सौर ऊर्जा क्षमता स्थापित किये जाने की संभावना है। यह सरकार के 1,00,000 मेगावाट के लक्ष्य से करीब 30 प्रतिशत कम है।