लखनऊ । उत्तर प्रदेश के ग्राम्य विकास राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डा. महेन्द्र सिंह ने नई दिल्ली के विज्ञान भवन में केन्द्र सरकार के जलशक्ति मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत की अध्यक्षता में जल संरक्षण और ग्रामीण पेयजल पर आयोजित बैठक में प्रदेश में पेयजल की समस्या पर अपना प्रस्तुतीकरण रखा। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में मुख्य रूप से पांच प्रकार की समस्यायें हैं, पहला आर्सेनिक और फ्लोराइड से प्रभावित क्षेत्र, दूसरा जेई और एईएस, तीसरा खारे पानी वाला क्षेत्र, चैथा बुन्देलखण्ड और पांचवां क्रिटिकल एवं सेमीक्रिटिकल जोन।उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार के पास जो सीमित संसाधन थे उसी में सफल प्रयास कर के हमने पानी की समस्या को दूर किया है। प्रधानमंत्री ने ‘‘नल से जल’ देने की बात कही है, जिसके दृष्टिगत प्रदेश सरकार ने बुन्देलखण्ड के लिये 9000 करोड़ रुपये का एक प्रोजेक्ट तैयार किया है। शिलान्यास के बाद शीघ्र ही उस पर कार्य आरम्भ किया जायेगा। पूरे प्रदेश में इसके लिये एक लाख 20 हजार करोड़ धनराशि की आवश्यकता है, जिससे हम पूरे प्रदेश के घर-घर में नल से पानी मुहैया करा सकेंगे। श्री सिंह ने कहा कि सूबे में जल संरक्षण के लिए 15 हजार तालाबों का जीर्णोद्धार कराने की योजना है। उन्होंने बताया कि इस एक लाख 20 हजार करोड़ की परियोजना में से 35 हजार करोड़ की परियोजना का डीपीआर तैयार है, जिसमें आर्सेनिक, फ्लोराइड, जेई और एईएस और बुन्देलखंड के क्षेत्रों में पानी की समस्याओं को दूर किया जाएगा। वर्तमान में विश्व बैंक सहायतित 14 जनपदों में नीर निर्मल परियोजना, चिह्नित आठ जनपदों में स्वजल परियोजना कार्यक्रम, राज्य ग्रामीण पेयजल कार्यक्रम, बुन्देलखंड व विन्ध्य क्षेत्र तथा प्रभावित ग्रामों में पाइप पेयजल योजना, प्रधानमंत्री जन कल्याण योजना तथा बुन्देलखंड पैकेज के अंतर्गत ग्रामीण समुदाय को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के कार्यक्रम संचालित हैं। प्रदेश के कुल 823 विकास खंडों में 113 डार्क, 59 क्रिटिकल एवं 45 सेमीक्रिटिकल हैं। प्रदेश सरकार द्वारा बुन्देलखण्ड व विन्ध्य क्षेत्र तथा गुणता प्रभावित ग्रामों में शुद्ध पेयजल उपलब्घ कराने के लिए पाइप पेयजल योजना प्रारंभ की गयी है। बुन्देलखण्ड क्षेत्र के अन्तर्गत जनपद ललितपुर, झांसी, जालौन, महोबा, हमीरपुर, बांदा एवं चित्रकूट तथा विन्ध्य क्षेत्र के जनपद मिर्जापुर एवं सोनभद्र के कुल 7628 ग्रामों में से 1908 ग्राम पाइप पेयजल योजनाओं से आच्छादित है। प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में ग्रीष्म ऋतु में पेयजल की समस्या के त्वरित समाधान कराने के लिए जनपद स्तरीय संबंधित प्रशासनिक मशीनरी को 24 घंटे एलर्ट पर रखते हुए पेयजल समस्या की सूचना ग्रामीण जनता से प्राप्त करने एवं प्राप्त सूचना के आधार पर पेयजल समस्या का त्वरित निस्तारण कराने के लिए जनपद स्तर पर कन्ट्रोल रूम स्थापित करते हुए नोडल अधिकारी नामित किये गये हैं।