भोपाल । गत दिनों पश्चिम बंगाल राज्य के कोलकाता के सरकारी मेडिकल कॉलेज में जूनियर डॉक्टरों पर हमले के विरोध में सोमवार को राजधानी के हमीदिया अस्पताल और सुल्तानिया अस्पताल के डॉक्टर हडताल पर रहेंगे। इस दौरान राजधानी के दोनों ही प्रमुख सरकारी अस्पताल की ओपीडी में मरीजों को इलाज नहीं मिलेगा और ऑपरेशन भी नहीं होंगे। इन अस्पतालों में सिर्फ इमरजेंसी मरीजों का उपचार किया जाएगा। कोलकाता के सरकारी मेडिकल कॉलेज में जूनियर डॉक्टरों पर हमले के बाद भोपाल की यूनाइटेड डॉक्टर्स फेडरेशन (यूडीएफ) ने यह निर्णय लिया है। फेडरेशन ने इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) की ओर से सोमवार को राष्ट्रीय स्तर पर घोषित हड़ताल के समर्थन में यह फैसला लिया है। शहर के जेपी व गैस राहत विभाग के डॉक्टर काम पर रहेंगे। आंदोलन के समर्थन में वह काली पट्टी बांधकर काम करेंगे। यूडीएफ की बैठक में तय किया गया है कि शहर के सभी निजी अस्पताल 17 जून की सुबह 6 बजे से 18 जून की सुबह 6 बजे तक सिर्फ इमरजेंसी मरीजों का इलाज करेंगे। हमीदिया और सुल्तानिया अस्पताल में कंसल्टेंट, सीनियर रेसीडेंट व जूनियर डॉक्टर भी सुबह 8 ः30 से 1ः30 बजे तक हड़ताल में रहेंगे। वह ओपीडी, वार्ड व ओटी में नहीं रहेंगे। सोमवार को भी ओपीडी बंद रहने से मरीजों को काफी परेशानी होगी। आईएमए राष्ट्रीय स्तर पर डॉक्टरों की सुरक्षा के लिए कानून बनाने की मांग कर रहा है, जिसमें कम से कम सात साल की सजा का प्रावधान हो। हालांकि, बैठक में यह तय किया गया है कि पश्चिम बंगाल में हड़ताल खत्म होने पर आईएमए राष्ट्रीय स्तर पर आंदोलन वापस लेता है तो भोपाल में भी हड़ताल खत्म हो जाएगी। 
    बैठक में यूडीएफ के महासचिव डॉ. ललित श्रीवास्तव, मेडिकल टीचर्स एसोसिएशन के प्रेसीडेंट डॉ. संजीव गौर, सचिव डॉ. राकेश मालवीय मौजूद थे। ओपीडी में मरीजों को इलाज नहीं मिलेगा। दोनों अस्पतालों में मिलाकर रोजाना करीब 45 ऑपरेशन होते हैं। इनमें सिर्फ इमरजेंसी ऑपरेशन किए जाएंगे। पहले से तय मरीजों की सोनोग्राफी जांचें नहीं हो पाएंगी। मरीजों की ड्रेसिंग नहीं हो पाएगी। भर्ती मरीजों की सभी तरह की जांचों के लिए पर्ची जूनियर, डॉक्टर व सीनियर रेसीडेंट बनाते हैं, लिहाजा उनकी जांचें नहीं हो पाएंगी। जूडा के पूर्व प्रेसीडेंट व मंडला जिले से विधायक डॉ. अशोक मस्कोले ने कहा है कि वह डॉक्टरों की मांगें सरकार तक पहुंचाएंगे। भोपाल में मप्र मेडिकल ऑफिसर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. देवेन्द्र गोस्वामी, जीएमसी जूडा के पूर्व अध्यक्ष डॉ. केके प्रजापति व मौजूदा अध्यक्ष डॉ. सचेत सक्सेना की मौजूदगी में हुई बैठक में डॉक्टरों पर हमले रोकने के लिए रणनीति पर चर्चा हुई। सभी ने मांग की है अस्पतालों की सुरक्षा किसी राष्ट्रीय स्तर की सुरक्षा एजेंसी को दी जानी चाहिए। साथ ही डॉक्टर प्रोटेक्शन एक्ट का सख्ती से पालन किया जाए। इस बारे में यूनाइटेड डॉक्टर्स फोरम के अध्यक्ष, डॉ. अनूप हजेला का कहना है कि शहर के सभी नर्सिंग होम 17 जून की सुबह 6 बजे से 18 जून सुबह 6 बजे तक आंदोलन में शामिल रहेंगे। इस दौरान सिर्फ इमरजेंसी मरीजों को इलाज दिया जाएगा। फोरम के सदस्यों की सहमति से यह निर्णय लिया गया है।