अब भारत अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों की मेजबानी कर सकेगा। इसका कारण है कि ओलिंपिक समिति (आईओसी) ने भारत पर अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों की मेजबानी पर लगे प्रतिबंधों को तत्काल प्रभाव से हटा दिया है। आईओसी ने भारतीय ओलिंपिक संघ (आईओए) को एक पत्र लिखकर यह जानकारी दी। इससे पहले खेल मंत्रालय ने आईओए को पत्र लिखकर कहा था कि वह उन सभी देशों और आईओसी से मान्यता प्राप्त खिलाड़ियों को भारत में होने वाले अंतरराष्ट्रीय खेला आयोजनों में भाग लेने की अनुमति दे रहा है।
इस पत्र को आईओए ने आईओसी के पास भेजा जिस पर आईओसी के कार्यकारी बोर्ड की बैठक हुई और इसके बाद भारत पर से अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों की मेजबानी को लेकर लगा प्रतिबंध हटा दिया गया। आईओसी के ओलिंपिक एकता तथा अनापत्ति प्रमाणपत्र समिति के निदेशक जेम्स मैक्लोड ने पत्र में लिखा है, 'हमें आपका 18 जून को 2019 का पत्र मिला, जिसमें भारतीय सरकार की सफाई थी। आईओसी कार्यकारी बोर्ड ने अपनी बैठक में स्थिति की समीक्षा की और भारत सरकार ने जो पत्र लिखा है, उसके आधार पर हमने फैसला लिया है कि 21 फरवरी 2019 को आईओसी के कार्यकारी बोर्ड ने अंतरराष्ट्रीय टूर्नमेंट की मेजबानी को लेकर भारत पर रोक और प्रतिबंध लगाया था, उसे तुरंत प्रभाव से हटा लिया गया है। साथ ही सभी अंतरराष्ट्रीय महासंघों को इसकी जानकारी दे दी गई है।' बीते साल भारत ने विश्व मुक्केबाजी चैंपियनशिप का आयोजन किया था, जिसमें कोसोवो के खिलाड़ियों, अधिकारियों और प्रशिक्षकों को हिस्सा लेने की अनुमति भारतीय सरकार ने नहीं दी थी।
कोसोवो को भारत ने मान्यता नहीं दी है। इस पर काफी विवाद हुआ था और आईओसी ने भारत को अंतरराष्ट्रीय स्तर के टूर्नामेंट की मेजबानी को लेकर प्रतिबंध लगा दिया था। इस मुद्दे को खेल मंत्रालय के सामने रखा गया था। इस बाबत खेल सचिव राधे श्याम जूलानिया ने आईओए को पत्र लिख कर कहा था कि हर उस देश और राष्ट्रीय महासंघ को भारत में अंतरराष्ट्रीय आयोजनों में हिस्सा लेने की अनुमति होगी जो आईओसी से मान्यता प्राप्त हैं।
खेल सचिव द्वारा आईओए के अध्यक्ष नरेंद्र बत्रा को लिखे गए पत्र में कहा गया है, 'यह हमारी नीति रही है कि हम अंतरराष्ट्रीय खेल स्पर्धाओं की मेजबानी करें और उन सभी राष्ट्रीय ओलिंपिक समिति को हिस्सा लेने की इजाजत दें, जो आईओसी या अंतरराष्ट्रीय महासंघ से जुड़े राष्ट्रीय महासंघ से मान्यता प्राप्त हैं।' पत्र में लिखा गया है, 'इस तरह की हिस्सेदारी पर हमारी राजनीतिक स्थिति और अन्य राजनीतिक मुद्दों को लेकर अपनाई गई हमारी सैद्धांतिक नीति जिसमें अंतरराष्ट्रीय मान्यता तथा खिलाड़ियों के देश की स्थिति का मुद्दा शामिल है को कोई असर नहीं होगा। भारतीय सरकार उन सभी खिलाड़ियों, अधिकारियों को भारत में होने वाले अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों में हिस्सा लेने की अनुमति देगी, जो आईओसी से मान्यता प्राप्त हैं।' आईओए के अध्यत्र बत्रा ने इसके लिए खेल मंत्रालय और खेल मंत्री को धन्यवाद दिया था। बत्रा ने साथ-साथ भारतीय मुक्केबाज महासंघ (BFI) के अध्यक्ष अजय सिंह का भी समर्थन के लिए शुक्रिया अदा किया है। 
2022 राष्ट्रमंडल खेलों से निशानेबाजी बाहर होने से झटका 
भारत को राष्ट्रमंडल खेल 2022 के लिए करारा झटका लगा है क्योंकि निशानेबाजी को इससे बाहर कर दिया गया है। वहीं पिछले साल राष्ट्रमंडल खेलों की निशानेबाजी स्पर्धा में भारत ने सात स्वर्ण सहित 16 पदक जीते थे। अब भारतीय टीम के लिए यह घाटा पूरा करना असंभव रहेगा। निशानेबाजी भारत के लिए कितनी जरुरी है, इसका अंदाजा इससे होता है कि पिछले साल भारतीय राष्ट्रीय राइफल संघ के अध्यक्ष रनिंदर सिंह ने कहा था कि निशानेबाजी को हटाये जाने पर भारत को 2022 राष्ट्रमंडल खेलों का बहिष्कार तक कर देना चाहिये।
इससे पहले राष्ट्रमंडल खेल महासंघ कार्यकारी बोर्ड की बैठक में महिला क्रिकेट, बीच वालीबाल और पैरा टेबल टेनिस को बर्मिंघम में 2022 में होने वाले खेलों में शामिल करने की मंजूरी दे दी गयी थी। इस पर सीजीएफ के 51 प्रतिशत सदस्यों की मंजूरी मिलना जरूरी है। बर्मिंघम 2022 के मुख्य कार्यकारी इयान रीड ने कहा ,‘‘ हमने काफी समीक्षा के बाद महिला क्रिकेट, बीच वालीबाल और पैरा टेबल टेनिस को शामिल करने का सुझाव दिया था।’’