24 साल की इर्तिका अयूब कश्मीर घाटी की सबसे कम उम्र की रग्बी कोच हैं। इर्तिका अभी कश्मीर की करीब 50 लड़कियों को रग्बी सिखा रही हैं। इर्तिका के लिए राष्ट्रीय स्तर पर पहुंचना आसान नहीं था।इर्तिका के पिता ने ही शुरू में उनके खेलने का विरोध किया पर जब वह अवसाद में चली गईं तो उन्होंने ही साथ दिया। पिता ने ही उन्हें हौसला रखने की हिम्मत दी। खेल में राजनीति का शिकार भी हुईं लेकिन हिम्मत नहीं हारी। 
इर्तिका ने 2017 में नैशनल लेवल पर स्नो रग्बी खेली और स्वर्ण पदक भी जीता। रग्बी ऑल इंडिया फेडरेशन ने उन्हें रग्बी डिवेलपमेंट ऑफिसर के तौर पर नियुक्त किया तो कोचिंग शुरू हुई। बाद में इर्तिका के सीनियर्स ने ही उस पर सवाल उठाना शुरू किया। उसे धमकियां मिलने लगीं और आंखिरकर उसे नौकरी छोड़नी पड़ी। इर्शिता ने कहा, ‘मैं टूट गयी थी और अवसाद में चली गई। छह महीने अवसाद में रही लेकिन पापा मुझे लगातार उत्साहित करते रहे। उन्होंने मुझे हिम्मत दी और मैं लड़ने के लिए फिर से उठ खड़ी हुई।
इर्तिका जब हायर सेकंडरी मैं थी तो घर वालों से छुपकर स्कूल में फुटबॉल खेलती थी। फिर स्पोर्ट्स टीचर ने उसे रग्बी में हिस्सा लेने को कहा। इर्तिका ने कहा कि मुझे रग्बी के बारे में कुछ पता नहीं था। उनके कहने पर मैंने खेलना शुरू किया। स्कूल स्तर पर और फिर जिला स्तर पर स्वर्ण जीता। नैशनल के लिए चयन हुआ तो घर वालों ने बाहर भेजने से मना कर दिया। कुछ साल बाद  पापा को मनाया। नैशनल में रजत पदक जीतने पर पापा ने साथ दिया। इर्तिका ने बाद में इंडिपेंडेंट काम करना शुरू किया। अब वह करीब 50 लड़कियों को कोचिंग दे रही हैं। अपनी पॉकेट मनी से वह उन्हें हफ्ते में तीन दिन रिफ्रेशमेंट भी देती हैं। इर्तिका के पास अभी खेल के जरूरी सामान भी नहीं हैं पर वह चाहती है कि लड़कियां अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेलें।