लाहौर । अंतरराष्ट्रीय दबाव में पाकिस्तान ने अपने आतंकी सरगनाओं हाफिज सईद और मौलाना मसूद अजहर के खिलाफ आतंकी गतिविधियों को लेकर कार्रवाई भले ही शुरू कर दी हो, लेकिन पाकिस्तान इन दोनों खूंखार आतंकियों की भारत में हुए आतंकवादी हमलों में संलिप्तता बड़ी चालाकी से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर छिपा ले गया है। दरअसल पड़ोसी देश ने इन दोनों के खिलाफ शुरू की गई कार्रवाई के पीछे भारत में हुई घटनाओं के बजाय अन्य आतंकी कारणों को जिम्मेदार बताया है। संयुक्त राष्ट्र (यूएन) में जैश-ए-मोहम्मद प्रमुख मसूद अजहर को वैश्विक आतंकवादी घोषित करने के पीछे उसका ओसामा बिन लादेन और अल कायदा का सहयोगी रहना बताया गया है। पाकिस्तान और चीन तकनीकी घालमेल कर भारतीय संसद पर हमले से लेकर पुलवामा हमले तक में जैश प्रमुख का हाथ होनेे को यूएन के रिकार्ड से बाहर रखने में कामयाब रहे हैं। भारत के सुरक्षा रणनीतिकार इसको लेकर खासे असहज हैं।
चीन से भी मिल रही है शह
सूत्रों के मुताबिक, पाकिस्तान को इस मामले में चीन से शह मिल रही है। चीन का पाकिस्तान में बड़े पैमाने पर आर्थिक निवेश है। ऐसे में आर्थिक परेशानियों से बुरी तरह जूझ रहे पाकिस्तान को लेकर सबसे ज्यादा चिंतित चीन ही है। पाकिस्तान के विफल राष्ट्र घोषित होने पर चीन ही सबसे ज्यादा प्रभावित होगा। इसलिए उसने अजहर व सईद जैसे आतंकियों की बलि चढ़ाकर पाकिस्तान को अपनी छवि सुधारने का आदेश दिया है। लेकिन साथ ही भारत में इन दोनों आतंकियों के कारनामों को रिकॉर्ड पर न लाकर पाकिस्तान के बचाव का रास्ता भी खोल रखा है।