ऑनलाइन मोबाइल फोन गेम पब्जी की लत ने कई बच्चों को नुकसान पहुंचाया है. छत्तीसगढ़ के कोरबा में ही एक बच्चे ने इस गेम की लत के कारण मोबाइल चोरी करने लगा, बाद में पुलिस ने उसे पकड़ा. देश भर में पब्जी गेम की लत से कई बच्चों की जान भी चली गई है. छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में भी इस ऑनलाइन गेम की लत कुछ स्कूली बच्चों को थी, लेकिन उन्होंने इससे छुटकारा पा लिया है और अब दूसरों को भी इस गेम के नुकसान से बचाने नो पब्जी गेम क्लब बनाया है.
मोबाइल पर बच्चों के ऑनलाइन गेम खेलने की लत से अधिकतर माता-पिता परेशान है, उन्हें उपाय भी नहीं सूझ रहा है कि कैसे उन्हें बाहर निकालें. रायपुर के एक निजी स्कूल की बच्चियों ने नो पब्जी गेम क्लब बनाया है. इस क्लब में वे बच्चियां शामिल हैं, जो पहले पब्जी गेम खेलती थी या कभी न कभी उसकी आदी रही हैं.
हैंड बैंड लगाकर जाती हैं स्कूल
क्लास 6वीं से लेकर 12वीं तक के ये बच्चे रोजाना हैंड बैंड लगाकर स्कूल आ रहे हैं, जिसमें नो पब्जी गेम लिखा हुआ है. इस बैंड को पहने के बाद घरवालों के साथ आस-पड़ोस व दोस्त-रिश्तेदार भी उनसे पूछ रहे हैं कि आखिर क्यों। बच्चे उन्हें इस अभियान के बारे में बताने के साथ इस गेम से हो रहे नुकसान को लेकर जानकारी देते हैं.
रक्षा बंधन पर लेंगी कसम
महीनेभर से चल रहे इस पहल का गजब का रिस्पॉंस मिला. स्कूली बच्चों के साथ मोहल्ले के दोस्त, रिश्तेदारों में भाई-बहन भी इससे प्रभावित हो रहे हैं और अब तक इस क्लब की लड़कियों ने नियमित रूप से पबजी गेम खेलने वाले 40 बच्चों को उस लत से बाहर निकाला है. अब ये बच्चियां इस रक्षाबंधन में अपने हाथ से नो पबजी गेम लिखे स्लोगन वाली राखी बनाकर उन्हें अपने भाईयों को बांधेंगी. वे उपहार में भी इस खेल को न खेलने की कसम लेंगी.

स्कूल ने की पहल
राजधानी रायपुर की पुरानी बस्ती स्थित छत्रपति शिवाजी गर्ल्स स्कूल के संचालक मुकेश शाह ने बताया कि कई परिजनों से हमें लगातार शिकायत मिलती रही है कि उनका बच्चा दिनभर मोबाइल में लगा रहता है. इन दिनों हर ऐज ग्रुप का बच्चा मोबाइल में ऑनलाइन खेले जाने वाले खेल पबजी, फ्री फायर जैसे अन्य गेम का आदी हो गया है. उसका व्यवहार बदलने के साथ वह चिड़चिड़ा हो रहा है। जून में स्कूल सत्र खुलने के बाद हमने स्कूल के शिक्षकों से इस मुद्दे पर बात की और एक अभियान चलाने की तैयारी की. सभी बच्चियों को इस तरह के गेम से होने वाले मानसिक व शारीरिक नुकसान को लेकर बताया. इसके बाद ऐसे बच्चियों की पहचान की गई, जो पबजी गेम खेलती हैं. उन्हें खुद इस आदत को छोड़ने और दूसरों साथियों को जागरूक करने की पहल की गई.