समरवैकेशन में शहर के 5 से 15 साल तक के बच्चों के लिए ब्रेन एबिलिटी डवलपमेंट वर्कशॉप में दो दिन की मुफ्त ट्रेनिंग दी जा रही है। बच्चों को जीनियस बनाने का यह फंडा सबको आश्चर्य में डाल रहा है। आंखों पर काली पट्टी बांध ये बच्चे 10 फुट दूर से बता देते हैं कि कितने लड़के-लड़कियां खड़े हैं, किसने किस कलर की ड्रेस पहनी है। बिना छुए या देखे एक फुट ऊपर से हाथ से स्कैन कर बता देते हैं कि ये क्या चीज है। बंद आंखों के उनके कारनामे बड़े-बड़ों की आंखें खोल देते हैं। बिना देखे किताब पढ़ सकते हैं। सूंघकर चीजों का रंग बता देते हैं। बिना देखे किताब पढ़ लेते हैं। शनिवार को वर्कशॉप में थोड़ी सी ट्रेनिंग के बाद नन्हें कृष्णा, शिवानी, माध्वी और भी बच्चों ने डेमो दिया तो देखने वाले दंग थे। इन बच्चों को छोटे पैकेट में बड़ा धमाका बताने लगे। पट्टी बांधने से पहले पुख्ता किया गया कि कहीं से इन्हें नजर ना आए। बच्चों ने बताया कि उनके दिमाग में चीजों की एक इमेज सी नजर आती है। या सूंघकर वे रंग बता सकते हैं। किसी भी चीज या व्यक्ति की एक बार स्मेल लेकर वे छुप जाए तो भी उसे बंद आंखों से ढूंढ़ लेंगे। ट्रेनर महावीर सरोया, त्रिलोक के मुताबिक पूरी तरह ट्रेंड होने के बाद दो मिनट में बिना पढ़े 200 पेज की किताब का सार बता सकते हैं, भले ही वह भाषा बच्चे नहीं जानते हो। सामने वाले का दिमाग स्कैन कर बता देंगे कि उनका घर कैसा है, घर में क्या-क्या है और भी बहुत से सीक्रेट्स...।