भोपाल । मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी मीडिया विभाग की अध्यक्ष श्रीमती शोभा ओझा ने आज जारी अपने बयान में कहा कि चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने उन्नाव केस को, यूपी से बाहर स्थानांतरित करने का जो ऐतिहासिक फैसला लिया है, वह स्वागत योग्य है, पर सवाल अभी भी यह है कि जहाँ उन्नाव पीड़िता की जान को खतरे में बताने का अंदेशा जताती हुई चिट्ठी पर कोई कार्यवाही नहीं हुई, वहीं उत्तरप्रदेश के भाजपा विधायक कुलदीप सेंगर ने सरकारी मशीनरी का दुरूपयोग कर पीड़िता के परिवार को डराने- धमकाने की पूरी कोशिश की। एक लड़की जिसने योगी आदित्यनाथ से लोहा लिया, उस पीड़िता की सारी शिकायतों को, उत्तरप्रदेश सरकार ने क्यूँ दरकिनार किया, यह सबसे बडा सवाल है। 
आज जारी अपने बयान में उपरोक्त विचार व्यक्त करते हुए श्रीमती ओझा ने आगे बताया कि एक साल तक न्याय और कानून व्यवस्था का मजाक बनाने और रेप के आरोपी के खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं करने के बाद अंततः बीजेपी ने कुलदीप सेंगर को बर्खास्त किया लेकिन इस बीच लगातार पीड़िता और उसके परिवार को निशाना बनाया जा रहा था। यह भी आश्चर्यजनक है कि मीडिया में निरंतर चल रही ऐसी रिपोर्टों के बावजूद, छोटी-छोटी बातों पर ट्वीट करने वाले, देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने, इस मामले में आपराधिक चुप्पी अख्तियार करते हुए, पीड़िता की सुरक्षा के मद्देनजर न तो कोई संज्ञान लिया, न ही कोई अहम कदम उठाया।
श्रीमती ओझा ने अपने बयान में आगे कहा उन्नाव रेप की पीड़िता के साथ हर मोड़ पर हुआ अन्याय बीजेपी सरकार की उदासीनता का आईना है। बीजेपी विधायक कुलदीप सेंगर अभी तक अपनी राजनीतिक पहुँच का इस्तेमाल कर केस पर प्रभाव डाल रहे हैं। इस देश में जहाँ महिला सुरक्षा बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ के नारे में सिमट कर रह गयी है, वहीं प्रधानमंत्री मोदी और अध्यक्ष अमित शाह की चुप्पी, सरकार के लिए आरोपी कुलदीप सेंगर को बचाने का साफ संदेश है, यह इस देश का दुर्भाग्य है।
श्रीमती ओझा ने अपने बयान में आगे कहा कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का कार्यकाल, डर और नफरत की राजनीति से प्रेरित रहा है। उन्नाव मामले में उनकी चुप्पी और पीड़िता को सुरक्षा मुहैया कराने में उनकी नाकामयाबी, यह साबित करती है कि उन्हें मुख्यमंत्री पद पर एक क्षण भी बने रहने का कोई हक नहीं है, प्रधानमंत्री मोदी को चाहिए कि वे मुख्यमंत्री योगी को तुरंत बर्खास्त करें। कांग्रेस पार्टी, अपनी राष्ट्रीय महासचिव श्रीमती प्रियंका गाँधी के नेतृत्व में पीड़िता के पक्ष में आवाज उठाएगी और यह सुनिश्चित करेगी कि कानून के ऊपर कोई भी नहीं। हम माननीय उच्चतम न्यायालय से अनुरोध करते हैं कि इस मामले में एक उदाहरण पेश करें, जिसमें न सिर्फ आरोपी को कड़ी से कड़ी सजा दी जाए बल्कि महिला सुरक्षा के मामले में देश की विधायिका और कार्यपालिका को समुचित निर्देश भी दिये जाएं।
श्रीमती ओझा ने अपने बयान के अंत में कहा कि उच्चतम न्यायालय के द्वारा पीड़िता को एयरलिफ्ट कर दिल्ली पहुँचाने के निर्देश ने, टीम मोदी के 56 इंच के घमंड को कम किया है और हम उच्चतम न्यायालय के इस फैसले का स्वागत करते हैं।