भोपाल
डॉ. हरिसिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय, सागर में अनुसूचित जाति (SC) के प्रमाण पत्र को लेकर चल रहा विवाद अब कार्रवाई तक पहुंच गया है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने बिजनेस मैनेजमेंट विभाग के प्रोफेसर श्री भगवत को निलंबित कर दिया है। उनकी नियुक्ति वर्ष 2005 में एससी वर्ग के लिए आरक्षित पद पर हुई थी। अब उनके द्वारा नियुक्ति के समय प्रस्तुत किए गए जाति प्रमाण पत्र की वैधता पर गंभीर सवाल उठे हैं।
विश्वविद्यालय की ओर से मामले की जांच के लिए गठित फैक्ट फाइंडिंग कमेटी ने अपनी रिपोर्ट प्रशासन को सौंप दी है। रिपोर्ट में उपलब्ध दस्तावेजों और संबंधित रिकॉर्ड के सत्यापन के आधार पर कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आने की बात कही गई है। इन्हीं निष्कर्षों के आधार पर विश्वविद्यालय ने प्रो. भगवत के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू करने का निर्णय लिया है।
2005 में SC आरक्षित पद पर हुई थी नियुक्ति
कमेटी की रिपोर्ट के मुताबिक, उत्तर प्रदेश के गोरखपुर निवासी प्रो. भगवत की नियुक्ति 16 अप्रैल 2005 को अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित पद पर हुई थी। हालांकि, जांच के दौरान उनके रिकॉर्ड में सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी वैध स्थायी एससी प्रमाण पत्र नहीं मिला।
जांच में यह भी सामने आया कि प्रो. भगवत ने छत्तीसगढ़ का अनुसूचित जाति प्रमाण पत्र प्रस्तुत किया था। कमेटी ने संबंधित जारीकर्ता प्राधिकारी के रिकॉर्ड से इस प्रमाण पत्र का सत्यापन कराने की कोशिश की, लेकिन इसकी पुष्टि नहीं हो सकी। रिपोर्ट में उल्लेख है कि छत्तीसगढ़ के संबंधित प्राधिकारी की ओर से प्रमाण पत्र वहां से जारी नहीं होने की जानकारी दी गई है।
यूपी में OBC श्रेणी में आने का दावा
फैक्ट फाइंडिंग कमेटी ने विभिन्न सक्षम अधिकारियों से प्राप्त सत्यापन रिपोर्ट का भी अध्ययन किया। इसके अनुसार प्रो. भगवत उत्तर प्रदेश की बिंद समुदाय से संबंधित बताए गए हैं, जिसे राज्य में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) की श्रेणी में रखा गया है।
कमेटी ने इन तथ्यों के आधार पर माना है कि एससी के लिए आरक्षित पद पर नियुक्ति कथित तौर पर गलत या अमान्य दावे के आधार पर हासिल की गई हो सकती है। रिपोर्ट में मामले में अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू करने की सिफारिश भी की गई है।
डीन पद पर होने से रिकॉर्ड प्रभावित करने की आशंका
विश्वविद्यालय प्रशासन ने निलंबन के पीछे एक अहम वजह उनकी वर्तमान प्रशासनिक जिम्मेदारी को भी बताया है। प्रो. भगवत फिलहाल स्कूल ऑफ कॉमर्स एंड मैनेजमेंट के डीन हैं। प्रशासन को आशंका है कि पद पर बने रहने की स्थिति में वे गवाहों को प्रभावित कर सकते हैं या विश्वविद्यालय से जुड़े रिकॉर्ड में हस्तक्षेप कर सकते हैं। इससे विभागीय जांच की निष्पक्षता प्रभावित होने की संभावना भी जताई गई है।
निलंबन आदेश के अनुसार, मामले में आगे की अनुशासनात्मक कार्रवाई अनुशासनात्मक प्राधिकारी द्वारा की जाएगी। अंतिम निर्णय विश्वविद्यालय की कार्यपरिषद लेगी। जांच पूरी होने तक प्रो. भगवत का मुख्यालय डॉ. हरिसिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय, सागर रहेगा।
मुझे इस मामले में कभी भी आधिकारिक रूप से पक्ष रखने का अवसर नहीं दिया गया। 30 जुलाई से जांच कमेटी गठित कर 3 अगस्त को फाइनल रिपोर्ट समिट कर दी गई। यह पूरी कार्रवाई पूरी प्रतिशोधत्मक है। कुलपति अपने निज स्वार्थ से चलते यह कर रहे हैं । मैं इस पूरे मामले में हाईकोर्ट जबलपुर की शरण लूंगा।
– प्रोफेसर श्री भगवत, डीन, स्कूल ऑफ कामर्स एंड मैनेजमेंट, डॉ हरीसिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय