विदिशा/भोपाल.
ग्यारसपुर क्षेत्र में रसोई गैस सिलिंडर में गैस की जगह पानी निकलने का चौंकाने वाला मामला सामने आया है। ग्यारसपुर निवासी विनीताबाई कुशवाहा ने बताया कि उन्होंने प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत गैस कनेक्शन लिया था और 13 अप्रैल को सिलिंडर भरवाया था। करीब 12 दिन उपयोग के बाद सिलेंडर ने काम करना बंद कर दिया।
परिजनों ने जब सिलेंडर की जांच की तो उसमें से पानी जैसी आवाज आने लगी और झुकाने पर पानी निकलने लगा। शिकायत लेकर एजेंसी पहुंचे विनीता के पति रमेश कुशवाहा को संतोषजनक जवाब नहीं मिला। जांच में सामने आया कि लगभग 4 किलो गैस उपयोग हो चुकी थी, जबकि शेष सिलेंडर में पानी भरा था। आर्थिक रूप से कमजोर परिवार नया सिलिंडर भरवाने में असमर्थ है, जिससे उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने भी एजेंसी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए प्रशासन से निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग की है। इस संबंध में गैस एजेंसी संचालक अभिषेक सुगंधि का कहना है कि उपभोक्ता को दोबारा बुकिंग करने के लिए कहा गया है और नंबर आने पर 4 किलो गैस की राशि समायोजित कर नया सिलेंडर दिया जाएगा।
एसडीएम ने किया उपार्जन केंद्रों का निरीक्षण, व्यवस्थाओं को परखा
किसानों की सुविधा और गेहूं उपार्जन कार्य को व्यवस्थित रखने के उद्देश्य से ग्यारसपुर क्षेत्र में एसडीएम शशि मिश्रा ने विभिन्न उपार्जन केंद्रों का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान चक पाटनी, चिरावटा एवं ग्यारसपुर स्थित वेयरहाउस पहुंचकर व्यवस्थाओं का जायजा लिया गया।निरीक्षण के दौरान तुलाई व्यवस्था, नमी मापदंड और रिकॉर्ड संधारण की बारीकी से जांच की गई। एसडीएम ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि किसानों को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो और उपार्जन कार्य पूरी पारदर्शिता के साथ संचालित किया जाए।
इस दौरान जिला परियोजना प्रबंधक संजय चौरसिया, वित्त जिला प्रबंधक जितेंद्र सुराना, आईबीसीवी जिला प्रबंधक रवि चौकसे, विकासखंड प्रबंधक रेखा वर्मा और सहायक विकासखंड प्रबंधक शोभा झा की टीम ने भी केंद्र का निरीक्षण किया। अधिकारियों ने तौल कांटों की स्थिति, तुलाई प्रक्रिया और कार्यप्रणाली की समीक्षा कर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। टीम ने हमालों से प्रति ट्रॉली गेहूं की मात्रा की जानकारी ली और सर्वेयर तथा वेयरहाउस संचालक से चर्चा कर व्यवस्थाओं का आकलन किया। साथ ही समूह की महिलाओं से संवाद कर उन्हें सहयोग देने के निर्देश दिए, ताकि उपार्जन कार्य सुचारू रूप से संचालित हो सके।