छप्पन भोग के साथ शक्तिपीठ गोविन्दपुर सिंघाड़ा वाली मैया का खुला पट।

छप्पन भोग के साथ शक्तिपीठ गोविन्दपुर सिंघाड़ा वाली मैया का खुला पट।

महुआ वैशाली से अजित कुमार की रिपोर्ट।

महुआ। मनोकामना सिद्ध व बली प्रथा के लिए प्रसिद्ध शक्तिपीठ गोविंदपुर सिंघाड़ा वाली मैया का पट मंगलवार की रात खुलने से मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। मां के दर्शन के साथ श्रद्धालुओं ने माता जी के जयकारे लगाते हुए माता की पूजा कर मंगल कामना की। हालांकि कोरोना को लेकर इस वर्ष आयोजित होने वाले पांच दिवसीय मेला का आयोजन नहीं होने लोगों में रोष है। यहां कोरोना वायरस को लेकर मंदिर परिसर में श्रद्धालु भक्तों की सुरक्षा के लिए सनिटाजर और मास्क अनिवार्य रूप उपयोग करने की अपील की गई है। इधर श्रद्धालुओं को सोशल डिस्टेसिंग का बखूबी पालन कराया जा रहा है। आयोजक सोहन सिंह, मोहन सिंह बताते हैं कि लगभग तीन सौ वर्ष पूर्व उनके महरौर वंश के पूर्वज राधाजीवन सिंह को सपने में मां भगवती ने इस स्थान पर मंदिर बनाकर पूजा अर्चना करने का आदेश दिया। माता के आदेश का पालन करते हुए राधाजीवन सिंह ने यहां मंदिर बनवा कर पूजा की शुरुआत की।

An open film of shaktipeeth govindpur singhan myya with a lighted offering.

क्या है मान्यता : गोविंदपुर सिंघाड़ा वाली इस मैया के बारे में ऐसी मान्यता है कि जो भक्त सच्चे दिल से माता के दरबार में पहुंच, जो भी मांगता है, माता उसको पूर्ण करती हैं।

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पूजन विधि एवं मूर्ति की क्या है विशेषता : यहां पूजा के लिए बनायी जाने वाली मूर्ति की विशेषता यह है कि यहां सैकड़ों वर्षों से एक ही आकृति की जीवंत मूर्ति बनायी जाती है। इतना ही नहीं मूर्ति बनाने वाले कारीगर स्थानीय ग्रामीण बैजू पंडित एवं उनके खानदान के लोग ही हैं। यहां पंचमी की रात्रि में दो बकरों की बलि के साथ ही माता का पट आम श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया जाता है। अगले दिन से बलि सहित अन्य पूजन कार्य नियत समयानुसार संपन्न होते हैं।

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