कुछ लोग गाय का दूध पिएंगे और सड़क पर छोड़ देंगे, जब वह फसल का नुकसान करेगी तो दोष मुझे देंगे: सीएम योगी

लखनऊ

 मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि कुछ लोग गाय का दूध पिएंगे, फिर उन्हें सड़कों पर बेसहारा छोड़ देंगे और जब ये गाय फसलों का नुकसान करेंगी तो दोष मुझे देंगे। हमारा संकल्प व संस्कार है कि गोमाता को कटने नहीं देंगे और देश की सुरक्षा के साथ कोई खिलवाड़ नहीं होने देंगे। उन्होंने सिख गुरुओं के इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि जब कोई आक्रांता या कसाई गोहत्या करता था, तो सिख वीर उसका वहीं काम तमाम कर देते थे। यह उस कालखंड की बात है, जब देश गुलाम था और लोग विदेशी आक्रांताओं के साये में जीवन व्यतीत कर रहे थे।

कानपुर में आयोजित ‘प्राकृतिक खेती कार्यशाला-2026’ को संबोधित करते हुए

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत का कोई ऐसा सनातन धर्मावलंबी नहीं होगा, जो गोमाता की उपासना न करता हो, उसे अपने जीवन व परिवार का हिस्सा न मानता हो। गोमाता आधारित खेती न केवल कृषि को सशक्त बनाती है, बल्कि गोमाता की रक्षा भी करती है। साथ ही, यह हम सभी को पुण्य का भागीदार भी बनाती है।

विदेशियों की नकल ने भारत को पीछे धकेला

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज से 2000 वर्ष पहले भारत की वैश्विक अर्थव्यवस्था में हिस्सेदारी 44 प्रतिशत थी। मुगलों की लूटपाट के बावजूद भारत की ग्लोबल इकॉनमी में हिस्सेदारी 24 प्रतिशत तक थी। जब तक भारत किसानों, व्यापारियों, नौजवानों और आधी आबादी के सामर्थ्य पर विश्वास करता रहा, तब तक देश समृद्धि की ऊंचाइयों को प्राप्त करता रहा। लेकिन, जब हमने विदेशियों की नकल करना शुरू कर दिया तो वही भारत विपन्न होते-होते आजादी के समय वैश्विक अर्थव्यवस्था में मात्र दो प्रतिशत हिस्सेदारी तक सिमट गया। लेकिन, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पिछले 12 वर्षों के दौरान देश ने नारी शक्ति, युवाओं, व्यापारियों और किसानों पर फिर से विश्वास किया। इसी का परिणाम है कि आज भारत पूरे विश्व में तेजी से आगे बढ़ता दिखाई दे रहा है।

ज्यादा लागत-कम आय से जूझ रहा था किसान

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत आज दुनिया की चौथी-पांचवीं बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है। अब भारत बीमारू नहीं, विकसित भारत बनने की दिशा में तेजी से अग्रसर देश है। यह विचार करने की आवश्यकता है कि वे कौन से कारण थे, जिन्होंने इतनी समृद्ध भूमि होने के बावजूद अन्नदाता किसानों को आत्महत्या करने के लिए मजबूर किया। 2014 से पहले किसान आत्महत्या कर रहा था, क्योंकि लागत अधिक व उत्पादन कम था और उपज का उचित मूल्य भी नहीं मिल पाता था।

मोदी सरकार ने दी डेढ़ गुना मूल्य देने की गारंटी

सीएम योगी ने कहा कि आजाद भारत में किसानों को उनकी लागत का न्यूनतम डेढ़ गुना मूल्य देने की गारंटी किसी ने दी, तो वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हैं। वर्ष 2004 से 2014 के बीच देश में लाखों किसानों ने आत्महत्या की, लेकिन 2014 के बाद इस पर विराम लग गया। पहली बार सॉइल हेल्थ कार्ड के माध्यम से धरती माता के स्वास्थ्य का परीक्षण शुरू हुआ। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के जरिए अन्नदाता किसानों को फसल सुरक्षा की गारंटी मिली। प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के माध्यम से सिंचाई की सुविधा बढ़ी। किसानों के लिए प्रोक्योरमेंट सेंटर स्थापित हुए और किसान सम्मान निधि की घोषणा की गई।

मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों को सहकारी समितियों के माध्यम से मिलने वाले उर्वरक (फर्टिलाइजर) पर सरकार भारी सब्सिडी दे रही है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में यूरिया बैग की कीमत करीब 4000 रुपये तक होती है, जबकि किसानों को एक चौथाई से भी कम कीमत पर इसे उपलब्ध कराया जाता है। किसान प्रति एकड़ रासायनिक उर्वरकों पर 10 से 12 हजार रुपये खर्च कर देता है। किसान की मेहनत को भी इसमें जोड़ दिया जाए तो उसकी कुल लागत 25 से 30 हजार रुपये तक पहुंच जाती है। इसके बावजूद सालभर की मेहनत के बाद उसे 10 हजार रुपये का शुद्ध लाभ भी नहीं मिल पाता।

जहर मुक्त खेती ही बेहतर भविष्य का आधार

मुख्यमंत्री ने कहा कि फर्टिलाइजर व पेस्टीसाइड के अत्यधिक उपयोग की वजह से कई बार हमारा उत्पादन दुनिया के बाजार में स्वीकार नहीं किया जाता, क्योंकि उसमें रासायनिक तत्वों की मात्रा अधिक होती है। इसका स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव होता है। आज से 30 वर्ष पहले किडनी खराब होने के इतने मामले नहीं होते थे। लोग हैंडपंप व तालाब का पानी पीते थे, मेहनत करते थे और सामान्य स्वस्थ जीवन जीते थे। आज लगभग हर मोहल्ले में दो-तीन किडनी रोगी मिल जाते हैं। लिवर सिरोसिस, ब्लडप्रेशर व डायबिटीज के मामलों में भी तेजी से वृद्धि हुई है।

सीएम ने कहा कि यह केवल व्यक्ति की गलती नहीं, बल्कि उस व्यवस्था का दोष है जो केमिकल फर्टिलाइजर व पेस्टीसाइड के उपयोग को बढ़ावा देती है। यदि किसान गो आधारित प्राकृतिक खेती की ओर बढ़ते हैं तो प्रति एकड़ 10 से 12 हजार रुपये की सीधी बचत रासायनिक उर्वरकों व कीटनाशकों पर होने वाले खर्च में ही हो जाएगी। स्वास्थ्य उत्तम होगा तो दवाओं पर भी खर्च बचेगा। आयुष्मान भारत व मुख्यमंत्री राहत कोष के माध्यम से आर्थिक सहायता तो दी जाती है, लेकिन बीमारी से प्रभावित व्यक्ति की जीवन गुणवत्ता प्रभावित हो जाती है। पूरा परिवार संकट में आ जाता है। लोग स्वस्थ रहेंगे तो अपनी ऊर्जा व प्रतिभा का उपयोग देश-समाज के विकास में कर सकेंगे।

34 जिलों में प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहन

मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले चार-पांच वर्षों में उत्तर प्रदेश में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए व्यापक प्रयास शुरू किए गए हैं। प्रदेश के 34 जिले प्राकृतिक खेती को तेजी से अपना रहे हैं। गंगा किनारे स्थित 27 जनपदों तथा बुंदेलखंड के सात जनपदों को प्राकृतिक खेती के लिए चिह्नित किया गया है। बुंदेलखंड के किसानों ने इस क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। प्राकृतिक खेती से जुड़े उत्पादों के सर्टिफिकेशन, पैकेजिंग व मार्केटिंग पर तेजी से कार्य करने की आवश्यकता है। कृषि मंडियों में इसके लिए व्यवस्थाएं विकसित की जा रही हैं। प्राकृतिक खेती से तैयार उत्पादों के बीज से लेकर फसल तैयार होने तक सर्टिफिकेशन की प्रक्रिया, शोरूम की स्थापना तथा उत्पादों को बाजार तक पहुंचाने की व्यवस्था पर भी कार्य किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश ने कृषि विज्ञान केंद्रों को प्राकृतिक खेती के प्रदर्शन का आधार बनाया है। अनेक किसान और संस्थाएं इस दिशा में अच्छा कार्य कर रही हैं। जहां कहीं भी कृषि प्रदर्शनी आयोजित हो, उसकी जिम्मेदारी किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) को दी जानी चाहिए। एफपीओ बहुत अच्छा कार्य कर रहे हैं। किसी ने मोटे अनाज (मिलेट्स), किसी ने दलहन तथा अन्य कृषि उत्पादों पर उत्कृष्ट कार्य किया है। ऐसे सफल किसानों और एफपीओ को प्रशिक्षण कार्यक्रमों से जोड़ना चाहिए।

14 लाख से ज्यादा गोवंश संरक्षित

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में 7700 से अधिक गोशालाओं में 14 लाख से ज्यादा गोवंश संरक्षित हैं, जिनकी राज्य सरकार देखभाल कर रही है। मुख्यमंत्री सहभागिता योजना के तहत एक गोवंश पालन पर 1500 रुपये प्रतिमाह दिए जाते हैं। यदि चार गोवंश हैं तो 6000 रुपये प्रतिमाह की सहायता दी जाती है। प्रदेश में लगभग डेढ़ लाख किसानों ने इस योजना के अंतर्गत गोवंश पालन अपनाया है। गाय का गोबर प्राकृतिक खेती के लिए काफी हद तक पर्याप्त हो सकता है। सीएम ने गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने इस दिशा में बहुत अच्छा कार्य किया है।

सीएम ने कहा कि प्राकृतिक खेती में बाजार से कुछ भी खरीदने की आवश्यकता नहीं पड़ती। किसान के खेत में जो उपलब्ध होता है, उसी से पूरी प्रक्रिया संचालित की जा सकती है। गाय के गोबर, गुड़ व पानी आदि को मिलाकर जीवामृत तैयार किया जाता है। उसका छिड़काव करने से प्राकृतिक खेती की शुरुआत होती है। किसान जब पसीना बहाता है तो धरती माता से सोना प्राप्त होता है।

विकसित भारत का आधार समृद्ध किसान-आत्मनिर्भर गांव

मुख्यमंत्री ने कहा कि देश वर्ष 2047 में आजादी का शताब्दी महोत्सव मनाएगा। स्वस्थ भारत ही विकसित भारत का संकल्प साकार करेगा। इसके लिए गो आधारित प्राकृतिक खेती को आधार बनाना होगा। भारत तब विकसित होगा, जब उत्तर प्रदेश विकसित होगा। उत्तर प्रदेश तब विकसित होगा, जब कानपुर विकसित होगा। कानपुर तब विकसित होगा, जब यहां का अन्नदाता किसान विकसित होगा, व्यापारी-कारीगर समृद्ध होंगे, हर चेहरे पर खुशी होगी और हर युवक के हाथ को काम मिलेगा।

बायोगैस व एथेनॉल उत्पादन में योगदान दें किसान

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एथेनॉल, बायो-कम्पोस्ट, कंप्रेस्ड बायोगैस (सीबीजी) की दिशा में कार्य करने का आह्वान किया है। किसानों को पराली जलाने के बजाय सीबीजी व एथेनॉल उत्पादन में योगदान देना चाहिए। इससे भारत ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने के लक्ष्य को प्राप्त कर सकेगा। यही अन्नदाता किसानों की समृद्धि का आधार भी है। 

विपक्ष का काम सिर्फ चिल्लाना

सीएम योगी ने कहा कि जब वैश्विक ऊर्जा संकट आया,  दुनिया अनेक चुनौतियों से जूझ रही थी, लेकिन भारत मजबूती के साथ खड़ा था। भारत में महंगाई नियंत्रित रही। विपक्ष सिर्फ आलोचना करना जानता है, लेकिन भारत वैश्विक संकटों का सामना करते हुए निरंतर आगे बढ़ रहा है। विपक्ष का काम सिर्फ चिल्लाना है और चिल्लाता ही रहेगा।

इस अवसर पर कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही, उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय, खादी-ग्रामोद्योग मंत्री राकेश सचान, कृषि राज्यमंत्री बलदेव सिंह औलख, राज्यमंत्री प्रतिभा शुक्ला, सांसद रमेश अवस्थी, महापौर प्रमिला पांडेय, विधायक महेश त्रिवेदी, अभिजीत सिंह सांगा, सुरेंद्र मैथानी, नीलिमा कटियार, राहुल बच्चा सोनकर, सरोज कुरील, जिला पंचायत अध्यक्ष स्वप्निल वरुण, विधान परिषद सदस्य सलिल विश्नोई, अरुण पाठक, राजबहादुर सिंह, अविनाश सिंह चौहान, गोसेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता, भाजपा के क्षेत्रीय अध्यक्ष प्रकाश पाल आदि मौजूद रहे।

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